भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भारतीय मुस्लिम नागरिक एवं BJP नेता क़ायम मेहदी द्वारा पत्र लिखकर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और कथित अत्याचारों पर गहरी चिंता जताई गई है।
पत्र में बांग्लादेश में एक हिंदू नागरिक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे न केवल अमानवीय बल्कि मानवता, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों पर सीधा हमला बताया गया है।
पत्र में कहा गया है कि किसी भी धर्म, समुदाय या देश में किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की हिंसा न तो स्वीकार्य है और न ही इसे किसी भी सूरत में जायज ठहराया जा सकता है।

क़ायम मेहदी ने जोर देकर कहा कि हिंसा चाहे किसी के भी खिलाफ हो, वह मानवाधिकारों और साझा मानवीय मूल्यों का उल्लंघन है।
उन्होंने बांग्लादेश में बीते वर्षों में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले, मंदिरों में तोड़फोड़, महिलाओं के साथ हिंसा और जबरन पलायन जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, जिससे वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में ऐसी स्थिति अस्वीकार्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए पत्र में कहा गया है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता के रूप में उनकी आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिक नेतृत्व का प्रतीक है।
ऐसे समय में जब पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी चिंता का विषय है। पत्र में भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह बांग्लादेश सरकार से संवाद कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को न्याय और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बनाए।
पत्र के अंत में लेखक ने कहा कि हिंदुओं के खिलाफ हो रहा यह अत्याचार किसी एक समुदाय का नहीं बल्कि पूरी मानवता का मुद्दा है। भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्य अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत मानवाधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएगा।

