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37 मानवाधिकार संगठनों ने की PFI संस्थापक ई. अबूबकर की रिहाई की मांग, बिगड़ते स्वास्थ्य पर जताई चिंता

करीब 37 मानवाधिकार संगठनों के गठबंधन “कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (CASR)” ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के संस्थापक अध्यक्ष E. Abubacker की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।

संगठनों ने कहा कि 72 वर्षीय अबूबकर को मानवीय और चिकित्सकीय आधार पर जेल से रिहा किया जाना चाहिए, क्योंकि उनकी सेहत लगातार खराब होती जा रही है।

CASR ने अपने बयान में कहा कि अबूबकर पिछले साढ़े तीन साल से अधिक समय से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत हिरासत में हैं और अभी भी विचाराधीन कैदी हैं। उन्हें 22 सितंबर 2022 को National Investigation Agency (एनआईए) ने उनके घर से गिरफ्तार किया था, उस समय वे ग्रासनली कैंसर के ऑपरेशन के बाद आराम कर रहे थे।

संगठनों के मुताबिक हाल के दिनों में अबूबकर की तबीयत काफी बिगड़ गई है। उन्हें लगातार खांसी, गंभीर सीने का संक्रमण, रक्तचाप और शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो रही हैं, साथ ही उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी कम बताया जा रहा है। इन जटिलताओं के चलते उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के Deen Dayal Upadhyay Hospital में भर्ती कराया गया है।

CASR ने कहा कि एक गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग कैदी को हिरासत में रखना अधिकारियों की “मानवता और कैदियों की गरिमा के प्रति घोर लापरवाही” को दर्शाता है। बयान के अनुसार अबूबकर कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनमें Parkinson’s disease, Diabetes, Hypertension और गंभीर दृष्टि हानि शामिल हैं। उन्हें पहले

गैस्ट्रोएसोफेजियल जंक्शन एडेनोकार्सिनोमा नामक दुर्लभ कैंसर भी हो चुका है, जिसके लिए 2020 में उनका ऑपरेशन और कीमोथेरेपी हुई थी।

मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला पहले हुई हिरासत में मौतों जैसी त्रासदी में बदल सकता है। उन्होंने 2021 में जेल में निधन हुए आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता Stan Swamy का भी जिक्र किया, जिनकी मौत न्यायिक हिरासत के दौरान हुई थी।

CASR ने सरकार से मांग की है कि अबूबकर को तुरंत मानवीय आधार पर रिहा किया जाए, उन्हें उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाए और सभी राजनीतिक कैदियों के जीवन व गरिमा के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए। संगठन ने नागरिक समाज, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की है।

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