बुधवार को जादवपुर विश्वविद्यालय के 68वें दीक्षांत समारोह के दौरान परिसर में कथित इस्लामोफोबिया के खिलाफ जोरदार विरोध देखने को मिला। समारोह के मंच पर “जादवपुर विश्वविद्यालय में इस्लामोफोबिया के लिए कोई जगह नहीं” लिखा पोस्टर प्रदर्शित किया गया, जिसने हाल ही में मुस्लिम छात्राओं के साथ हुई एक घटना की ओर सबका ध्यान खींचा।
यह विरोध अंग्रेजी विभाग के प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया गया, जो दीक्षांत समारोह में अपनी डिग्री प्राप्त करने पहुंचे थे। छात्रों का कहना है कि यह विरोध विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ते भेदभाव और मुस्लिम छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ था।
यह मामला सोमवार को अंग्रेजी विभाग में आयोजित एक परीक्षा से जुड़ा है। छात्रों के अनुसार, प्रोफेसर सस्वती हलदर ने नकल के संदेह में तीसरे वर्ष की दो मुस्लिम छात्राओं को परीक्षा के अंतिम घंटे में हिजाब हटाने के लिए कहा।
आरोप है कि इससे न केवल छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हुईं बल्कि उनका परीक्षा प्रदर्शन भी प्रभावित हुआ।
छात्रों का कहना है कि एक छात्रा को अन्य छात्रों के सामने हिजाब हटाने के लिए कहा गया, जबकि दूसरी छात्रा को अलग कमरे में ले जाकर ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया।
एक छात्रा ने बाद में बताया कि उसने केवल यह दिखाने के लिए हिजाब का एक छोटा हिस्सा हटाया कि उसके पास कोई ईयरफोन नहीं था।
छात्रों ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन
घटना के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य को एक लिखित शिकायत सौंपी। पत्र में आरोप लगाया गया कि यह व्यवहार धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण है और इससे अल्पसंख्यक छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है।
शिकायत पत्र में कहा गया,
“यह आचरण समानता और सहिष्णुता के उन मूल्यों के खिलाफ है जिनका पालन एक शैक्षणिक संस्थान को करना चाहिए। हम मांग करते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”
छात्रों का आरोप: मानसिक उत्पीड़न और अपमान
मकतूब से बात करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के छात्र जाहित खान ने कहा,
“छात्राओं को कक्षा में सभी के सामने, यहां तक कि पुरुष छात्रों की मौजूदगी में भी, हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया गया। जब विरोध किया गया तो उन्हें अलग कमरे में ले जाया गया।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने छात्राओं से उनके हिजाब पहनने के कारण पूछे और यहां तक कहा कि क्या उन्हें इससे घुटन महसूस होती है। छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद वे भय और असुरक्षा में हैं।
कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से उन्होंने फिलहाल इनकार किया है।
वहीं, अंग्रेजी विभाग के शिक्षकों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि हाल के दिनों में नकल के मामलों में वृद्धि के कारण जांच की गई थी और इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। संकाय सदस्यों का कहना है कि कई छात्रों की जांच हुई थी और यह प्रक्रिया धार्मिक आधार पर नहीं थी।

