गाजियाबाद से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अपराध नियंत्रण के नाम पर चलाए जा रहे अभियान के दौरान गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसी अद्भुत तकनीक खोज निकालने का दावा किया है, जो किसी भी इंसान को देखते ही यह बता देती है कि वह “नागरिक है या संदिग्ध”।
वायरल वीडियो के मुताबिक, इस मशीन की खासियत यह है कि इसे न तो आधार कार्ड चाहिए, न वोटर आईडी और न ही कोई सरकारी रिकॉर्ड। बस व्यक्ति को देखकर, उसकी शक्ल-सूरत और पहनावे के आधार पर तुरंत फैसला सुना दिया जाता है।
इसी तकनीक के तहत अस्थायी बस्तियों और झुग्गियों में रह रहे लोगों से पूछताछ कर उनके दस्तावेज खंगाले गए।
पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया अपराध नियंत्रण के लिए की गई, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब देश में नागरिकता तय करने के लिए “मानवाधिकार” नहीं बल्कि “मशीन जैसी सोच” काम करेगी?
कई यूजर्स ने तंज कसते हुए इसे “मोदी जी की नागरिकता टेक्नोलॉजी” तक बता दिया।
हालांकि पुलिस ने सफाई दी है कि यह केवल नियमित सत्यापन था, लेकिन जिस तरह से चुनिंदा इलाकों और लोगों को निशाना बनाया गया, उसने इस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

