ईसाई समुदाय के खिलाफ बढ़ती लक्षित हिंसा पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने चिंता जताई
संगठन ने वर्ष 2026 को “न्याय, शांति, एकता, समावेशी और स्थायी विकास” का साल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की है।
यह बातें शनिवार को नई दिल्ली स्थित जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में आयोजित मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गईं। प्रेस को संबोधित करते हुए जमाअत के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि भारत सह-अस्तित्व और सांप्रदायिक सद्भाव की एक समृद्ध विरासत वाला देश रहा है, लेकिन यह विरासत आज खतरे में है।
उन्होंने सांप्रदायिक बयानबाजी, इस्लामोफोबिया, नफरती भाषण, मॉब लिंचिंग और धार्मिक भेदभाव में वृद्धि पर गंभीर चिंता जताई।
प्रो. इंजीनियर ने साउथ एशिया जस्टिस कैंपेन के 2025 इंडिया पर्सेक्यूशन ट्रैकर का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के खिलाफ राज्य और राज्येतर अत्याचारों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि इनमें गैर-कानूनी हत्याएं, भीड़ हिंसा, मनमानी गिरफ्तारियां, बदले की भावना से की गई तोड़फोड़, बड़े पैमाने पर नफरती बयान और जबरन निष्कासन जैसी घटनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कुछ बड़ी घटनाओं के बाद इन कार्रवाइयों में और तेज़ी आई है।
उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का दुरुपयोग कर समाज में विभाजन पैदा कर रही हैं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि भारतीय समाज में इतनी समझ और नैतिक शक्ति है कि वह सांप्रदायिक ताकतों को पराजित कर सके।
प्रो. सलीम इंजीनियर ने बताया कि जमाअत-ए-इस्लामी हिंद धार्मिक जन मोर्चा और सद्भावना मंच जैसे इंटरफेथ प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संवाद और शांति की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन पहलों को और आगे बढ़ाने के लिए संगठन ने 2026 को “सभी के लिए न्याय, शांति, एकता और समावेशी स्थायी विकास का वर्ष” बनाने की अपील की है।
सर्दियों में गरीबों की स्थिति पर बोलते हुए जमाअत के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि संगठन समान विचारधारा वाले समूहों के साथ मिलकर उत्तर और पूर्वी भारत में बड़े पैमाने पर कंबल वितरण अभियान चला रहा है। उन्होंने बताया कि ये कंबल जरूरतमंदों को धर्म, जाति या पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना दिए जा रहे हैं।
उन्होंने सरकार से नाइट शेल्टर बढ़ाने, गर्म कपड़े और भोजन उपलब्ध कराने, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां तैनात करने और ठंड से जुड़ी चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने की मांग की।
मलिक मोतसिम खान ने देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाई समुदाय के खिलाफ बढ़ती लक्षित हिंसा पर भी चिंता जताई और कहा कि जमाअत संकट की इस घड़ी में ईसाई समुदाय के साथ खड़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रार्थना सभाओं में रुकावट, दफन से जुड़े विवाद और धर्मांतरण विरोधी कानूनों के दुरुपयोग जैसी घटनाओं को रोका नहीं गया, तो इससे समाज में भय और अविश्वास बढ़ेगा।
उन्होंने त्रिपुरा में एमबीए छात्र एंजेल चकमा की कथित लिंचिंग की कड़ी निंदा करते हुए इसे नस्लीय भेदभाव पर आधारित नफरती अपराध बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले कानून व्यवस्था की विफलता को उजागर करते हैं।
उन्होंने उत्तराखंड सरकार से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, कड़ी कानूनी कार्रवाई, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा तथा न्याय और मुआवज़े की गारंटी की मांग की।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने नस्लीय और नफरत पर आधारित हिंसा के खिलाफ एक व्यापक राष्ट्रीय कानून बनाने की भी आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

