आज की दुनिया में, जहाँ ज़्यादातर ख़बरें टकराव और तनाव पर केंद्रित रहती हैं, वहीं प्राकृतिक आपदाओं के समय की गई मानवीय मदद राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत की एक मिसाल पेश करती है।
पिछले कुछ दशकों में इज़राइल ने यह दिखाया है कि आपदा के समय तेज़, संगठित और पेशेवर राहत कैसे पहुँचाई जा सकती है। नेपाल, हैती, तुर्की और भारत जैसे अलग-अलग देशों में इज़राइल की आपदा राहत कोशिशें इसी सोच को दर्शाती हैं कि इंसानी जान बचाना हर राजनीतिक मतभेद से बड़ा होता है।
2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद इज़राइल की भूमिका खास तौर पर चर्चा में रही। भूकंप के कुछ ही दिनों के भीतर इज़राइली टीमों ने काठमांडू में एक आधुनिक फील्ड हॉस्पिटल खड़ा कर दिया। इसमें सर्जरी, ट्रॉमा केयर, नवजात शिशुओं की देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सुविधाएँ मौजूद थीं। इस अस्पताल में हज़ारों घायल लोगों का इलाज किया गया।
इसके अलावा, मलबे में फँसे लोगों को निकालने के लिए इज़राइली रेस्क्यू टीमों ने भी अहम योगदान दिया, जिसकी स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सराहना की।
इससे पहले, 2010 में हैती में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी इज़राइल की मदद को व्यापक रूप से सराहा गया। पोर्ट-ऑ-प्रिंस में स्थापित इज़राइली फील्ड हॉस्पिटल आपदा के तुरंत बाद काम करने वाले सबसे प्रभावी चिकित्सा केंद्रों में से एक था। यहाँ जटिल ऑपरेशन किए गए, आपात स्थिति में बच्चों का जन्म कराया गया और दूर बैठे विशेषज्ञों से सलाह के लिए टेलीमेडिसिन तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस अस्पताल को ज़मीन पर मौजूद सबसे बेहतर काम करने वाली चिकित्सा इकाइयों में से एक बताया।
2023 में तुर्की में आए भूकंप के बाद भी इज़राइल ने बिना देर किए राहत टीमें भेजीं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद, इज़राइली सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद से मलबे में दबे लोगों को ढूँढने में सहायता की।
डॉक्टरों और पैरामेडिक्स ने घायलों का इलाज किया और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया। इस मिशन ने साफ़ कर दिया कि आपदा के समय इंसानियत राजनीति से ऊपर होती है।
भारत के साथ भी इज़राइल का आपदा प्रबंधन सहयोग पुराना है। 2001 के गुजरात भूकंप के बाद इज़राइली विशेषज्ञों ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग किया और आपात चिकित्सा व आपदा प्रबंधन से जुड़ा तकनीकी अनुभव साझा किया। इसके बाद के वर्षों में दोनों देशों के बीच आपदा तैयारी, प्रशिक्षण और चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग और मज़बूत हुआ है।
इज़राइल की आपदा राहत का सबसे अहम पहलू उसकी तैयारी और आत्मनिर्भरता है। उसकी टीमें अपने साथ बिजली व्यवस्था, पानी शुद्ध करने की मशीनें, मोबाइल लैब और उन्नत चिकित्सा उपकरण लेकर चलती हैं।
इससे प्रभावित देश की स्थानीय व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता और आपदा के शुरुआती, सबसे नाज़ुक घंटों में तुरंत मदद पहुँचाई जा सकती है। इन मिशनों से यह भी साफ़ होता है कि आपदा राहत एक तरह की “शांत कूटनीति” है जो शब्दों से नहीं, बल्कि काम से बात करती है। नेपाल, हैती, तुर्की और भारत में बचाई गई ज़िंदगियाँ इस बात का सबूत हैं कि सही तैयारी, पेशेवर कौशल और तेज़ निर्णय इंसानियत की सबसे बड़ी सेवा बन सकते हैं।
आज जब प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं, इज़राइल का अनुभव यह सिखाता है कि सीमाओं, धर्मों और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर की गई मानवीय मदद ही असली वैश्विक ज़िम्मेदारी है।

