ओडिशा के जगतसिंहपुर ज़िले के एक बंगाली मुस्लिम परिवार के 14 सदस्यों को दिसंबर महीने में कथित तौर पर भारत-बांग्लादेश सीमा पर जबरन धकेल दिया गया।
परिजनों के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इस पूरे परिवार—जिसमें पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं—को बांग्लादेश भेज दिया।
द स्क्रॉल की रिपोर्ट के मुताबिक़, परिवार के सदस्य इस समय भारत और बांग्लादेश के बीच स्थित ‘नो मैन्स लैंड’ में फँसे हुए हैं।
बांग्लादेश के सीमा अधिकारियों ने उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सभी 14 लोग एक साथ सीमा के निर्जन क्षेत्र में खड़े रहने को मजबूर हैं।
बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें हिरासत में लिया गया है।
परिवार के रिश्तेदार सैफुल अली खान ने स्क्रॉल को बताया कि यह परिवार पिछले 70 वर्षों से भी अधिक समय से ओडिशा में रह रहा था। परिवार की सबसे बुज़ुर्ग सदस्य 90 वर्षीय महिला हैं।
परिजनों का कहना है कि सभी के पास स्थानीय निवास से जुड़े दस्तावेज़ मौजूद थे, इसके बावजूद उन्हें विदेशी बताकर सीमा पार कराई गई।
यह मामला नागरिकता, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

