काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। आपदा में अब तक कम से कम 633 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
बाढ़ के बाद एक और ग्लेशियल बाढ़ की आशंका के चलते बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। खतरा कम होने के बाद नेपाल और चीन की सीमा से लगे प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य दोबारा शुरू कर दिए गए हैं।
हालांकि, नए बने ग्लेशियल झील से संभावित खतरे को देखते हुए बचावकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि हिमालय में ग्लेशियर का एक हिस्सा ढहने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नदी में जा गिरा, जिससे अचानक तेज बहाव वाली बाढ़ आई।
पानी और मलबे के इस सैलाब ने कई गांवों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप को संभावित कारण बताया गया था, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया कि दर्ज किया गया भूकंपीय संकेत संभवतः भूस्खलन के कारण था।
आपदा से नेपाल के अलावा तिब्बत का सीमावर्ती क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में हजारों लोग अब भी लापता हैं, जिनमें विदेशी नागरिक, पर्यटक, तीर्थयात्री और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं।
बचाव अभियान में सेना, पुलिस और अन्य आपातकालीन दलों को लगाया गया है। कई इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण राहत टीमों को पहुंचने में मुश्किल हो रही है। कुछ लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में भी फंसे हुए बताए गए हैं, जिन्हें निकालने के लिए विशेष बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के बाद मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

