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दिल्ली में SIR वापस लेने की मांग, Voter Adhikar Manch का दावा- ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58.6 लाख नाम गायब

नई दिल्ली, 9 सितंबर 2026: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। Voter Adhikar Manch ने SIR को पूरी तरह वापस लेने और 2025 विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर रही है।

8 सितंबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जारी प्रेस रिलीज और मांगपत्र में नागरिकों के समूह ने दावा किया कि 31 जनवरी 2025 को दिल्ली की मतदाता सूची में 1,56,14,000 मतदाता थे, जबकि 31 अगस्त 2026 को जारी SIR की ड्राफ्ट सूची में केवल 97,53,577 मतदाता रह गए। समूह के मुताबिक, दोनों आंकड़ों के बीच 58,60,423 मतदाताओं का अंतर है। इनमें से 11,03,701 नाम SIR शुरू होने से पहले हटाए गए, जबकि 47,56,722 मतदाताओं को enumeration के बाद ASDD सूची में रखा गया।

Voter Adhikar Manch ने आरोप लगाया कि उसके हेल्पलाइन और सहायता केंद्रों के जरिए ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, कुछ लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया, जबकि कई मतदाताओं ने enumeration form जमा करने के बावजूद खुद को ड्राफ्ट सूची से बाहर पाया। संगठन के अनुसार, अप्रैल 2026 में अकेले 3,39,509 नाम हटाए गए, जो इससे पहले के छह महीनों के मासिक औसत से करीब 20 गुना अधिक था।

संगठन ने यह भी दावा किया कि दिल्ली की 70 में से 68 विधानसभा सीटों पर बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत के अंतर से अधिक थी। इसके अलावा, जेजे बेला एस्टेट, विजय घाट के एक मतदान केंद्र का उदाहरण देते हुए कहा गया कि जहां पहले 729 मतदाता दर्ज थे, वहां SIR के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में सिर्फ एक मतदाता रह गया। संगठन का दावा है कि इलाके के 500 से अधिक लोगों ने enumeration forms जमा किए थे, फिर भी ASDD सूची में 728 लोगों को बाहर दिखाया गया।

Voter Adhikar Manch ने कई मतदाताओं के मामलों का हवाला देते हुए प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाए। मंगोलपुरी के कांता प्रसाद और जगदंबा कैंप की 71 वर्षीय विरमा को कथित तौर पर ASDD सूची में मृत बताया गया, जबकि दोनों जीवित हैं। वहीं मंगोलपुरी की अनीता जायसवाल को कथित तौर पर ‘permanently shifted’ बताया गया, जबकि उन्होंने अपने पते में बदलाव किया था।

संगठन ने दावा किया कि ट्रांसजेंडर मतदाताओं में लगभग 65 प्रतिशत नाम हटाए गए। इसके पीछे दस्तावेजों की कमी और अलग-अलग पहचान पत्रों में नाम तथा जेंडर मार्कर में अंतर को वजह बताया गया। समूह ने ट्रांस मतदाताओं के लिए अलग सुरक्षा उपाय लागू करने और उनकी पहचान या पूर्व नाम को सार्वजनिक न करने की मांग की है।

राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने मतदाता नामों में बड़े पैमाने पर हुई कथित कटौती की जांच की मांग की। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती।

वहीं पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने चुनाव आयोग की जवाबदेही और 2025 के विधानसभा चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि चुनाव आयोग को अब अपनी ही पुरानी मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां मिल रही हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

Voter Adhikar Manch ने मांग की है कि SIR को वापस लेकर 2025 विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई मतदाता सूची बहाल की जाए। संगठन ने कहा कि जिन मतदाताओं को गलत तरीके से ASDD सूची में डाला गया है, उनके नाम बिना Form 6 भरवाए बहाल किए जाएं।

संगठन ने यह भी मांग की कि किसी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के ड्राफ्ट सूची से न हटाया जाए। गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और बूथ स्तर पर दावे-आपत्तियां दर्ज करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।

Voter Adhikar Manch का आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया ने गरीबी, विस्थापन, शादी और प्रवास जैसी परिस्थितियों को मतदाता सूची से बाहर किए जाने का आधार बना दिया है। समूह ने कहा कि भविष्य में यदि व्यापक पुनरीक्षण किया जाता है तो उसे पारदर्शी, समावेशी और उचित कानूनी प्रक्रिया के साथ अधिक समय देकर पूरा किया जाना चाहिए।

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