कोलकाता, 10 अगस्त 2026: एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों और मज़ारों की समितियों को दिए जा रहे कथित पुलिस सर्वे फॉर्म को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस से इन फॉर्मों के स्रोत, उद्देश्य, अधिकार और कानूनी आधार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की है।
APCR के मुताबिक, इन फॉर्मों में संबंधित धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और स्थिति से जुड़ी कई तरह की जानकारियां मांगी जा रही हैं। इनमें संस्थान की धार्मिक संबद्धता, जमीन का स्वामित्व, फंडिंग, विदेशी आगंतुकों या छात्रों की जानकारी, पूर्व के मामलों, एफआईआर और चार्जशीट के अलावा कुछ राजनीतिक और संगठनात्मक जानकारियां भी शामिल हैं।
संगठन का कहना है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने की ऐसी कोई भी प्रक्रिया स्पष्ट सरकारी आदेश और निर्धारित कानूनी ढांचे के तहत ही होनी चाहिए। APCR ने दावा किया कि उसके पास उपलब्ध फॉर्म की प्रतियों में किसी सरकारी अधिसूचना, मेमो नंबर, तारीख, जारी करने वाले प्राधिकरण या उस विशेष कानूनी प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिसके तहत यह जानकारी मांगी जा रही है।
APCR ने सवाल उठाया कि यदि ये फॉर्म किसी आधिकारिक सरकारी या पुलिस आदेश के तहत जारी किए गए हैं, तो संबंधित धार्मिक संस्थानों और आम लोगों के सामने उस आदेश को उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया है।
संगठन ने विशेष रूप से मस्जिदों और अन्य धार्मिक संस्थानों की धार्मिक या संप्रदायगत संबद्धता से जुड़ी जानकारी मांगे जाने पर सवाल उठाया है। APCR ने अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इस तरह की जानकारी किस उद्देश्य से मांगी जा रही है और सर्वे के घोषित उद्देश्य से इसका क्या संबंध है।
APCR ने यह भी स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से शुरू किया गया राज्यव्यापी मदरसा सर्वे एक अलग प्रक्रिया है। संगठन के अनुसार, सरकार द्वारा स्वीकृत मदरसा सर्वे का अस्तित्व अपने आप में किसी अलग पुलिस फॉर्म को जारी करने या उसमें अतिरिक्त संवेदनशील जानकारी जुटाने का अधिकार साबित नहीं करता।
APCR ने पश्चिम बंगाल सरकार और पश्चिम बंगाल पुलिस से मांग की है कि वे सार्वजनिक रूप से बताएं कि इन सर्वे फॉर्मों को किसने जारी किया है, इनका उद्देश्य क्या है और इनके पीछे कौन-सा कानूनी प्रावधान है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि सर्वे के दौरान जुटाई गई जानकारी तक किन लोगों की पहुंच होगी और संवेदनशील डेटा को किस तरह सुरक्षित रखा जाएगा तथा उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाएगा।
APCR ने कहा कि वह कानूनी प्रशासनिक सत्यापन या संस्थानों के उचित रिकॉर्ड बनाए रखने की वास्तविक कोशिशों का विरोध नहीं करता। हालांकि, संगठन के मुताबिक ऐसी प्रक्रिया पारदर्शी, कानूनी और गैर-भेदभावपूर्ण होनी चाहिए और इसका इस्तेमाल किसी विशेष धार्मिक समुदाय की प्रोफाइलिंग या चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए।
APCR की पश्चिम बंगाल इकाई ने कहा कि यदि यह आधिकारिक सरकारी सर्वे है तो संबंधित सरकारी आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं, यदि यह पुलिस की पहल है तो अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि किस कानून के तहत और किस उद्देश्य से धार्मिक संस्थानों से इतनी संवेदनशील जानकारी जुटाई जा रही है।

