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भाजपा सरकार ने छात्रों के साथ आतंकियों जैसा सलूक किया: कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट

नई दिल्ली, 10 अगस्त: बिहार में छात्रों के आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस बर्बरता को लेकर कांग्रेस की छह फैक्ट-फाइंडिंग टीमों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छह जिलों में जांच के बाद कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि अपने अधिकारों और रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्रों के साथ पुलिस ने बेहद कठोर व्यवहार किया और कई जगह लाठीचार्ज, गिरफ्तारी तथा फायरिंग की घटनाएं सामने आईं।

नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सांसद पप्पू यादव, सांसद मनोज कुमार, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब समेत फैक्ट-फाइंडिंग टीमों के सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष सामने रखे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों द्वारा रोजगार और भर्ती परीक्षाओं को लेकर आवाज उठाने पर उन्हें समाधान देने के बजाय लाठीचार्ज, एफआईआर और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस के मुताबिक, टीमों ने विभिन्न जिलों में पीड़ित छात्रों, युवाओं, प्रत्यक्षदर्शियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर घटनाओं की जानकारी जुटाई। टीम ने आरोप लगाया कि कुछ युवाओं को रात में उनके घरों से हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए। कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि कुछ परिवारों को पुलिस की ओर से धमकाए जाने की शिकायतें मिली हैं।

फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर एके-47 और पिस्तौल से गोलियां चलाई गईं। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इस घटना में कई छात्र घायल हुए। उन्होंने दावा किया कि एक छात्र के कंधे, दूसरे की गर्दन और अग्निवीर भर्ती की मेडिकल परीक्षा पास कर चुके एक अन्य युवक के घुटने में गोली लगी।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि घायल युवक के पैर में गोली लगने के बावजूद पुलिस ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट जारी रखी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में पुलिस ने फायरिंग की घटना से इनकार किया, लेकिन बाद में एके-47 और पिस्तौल से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी के निलंबन की कार्रवाई की गई।

फैक्ट-फाइंडिंग टीमों ने दावा किया कि छात्रों पर एके-47 से गोली चलाए जाने की घटना बेहद गंभीर है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह के घातक हथियार का इस्तेमाल किसके आदेश पर किया गया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन के बाद बिहार में 117 छात्रों के नाम अखबारों में अपराधियों की तरह प्रकाशित किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्दोष छात्र का चेहरा और नाम बिना न्यायिक प्रक्रिया के सार्वजनिक कर उसे अपराधी घोषित किया जा सकता है।

कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के बाद कुछ छात्रों पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं। पूर्णिया में शांतिपूर्ण मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा कि उसके पास घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं।

कांग्रेस नेताओं ने बिहार सरकार की भर्ती और परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि अडानी को कथित तौर पर एक रुपये में बड़ी मात्रा में जमीन दी जा सकती है, तो छात्रों से भर्ती परीक्षाओं के लिए फीस क्यों ली जाती है।

उन्होंने छात्रों की ओर से सवाल उठाते हुए कहा कि सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं की फीस एक रुपया क्यों नहीं की जा सकती?

कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग टीमों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें परीक्षा केंद्रों को कमिश्नरी या जिला स्तर तक सीमित करना, ताकि छात्रों को यात्रा और ठहरने का अतिरिक्त खर्च न उठाना पड़े; सभी सरकारी भर्तियों के लिए समयबद्ध और पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर जारी करना तथा गरीब छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म तैयार करना शामिल है।

कांग्रेस नेताओं ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि छात्रों पर एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किसके निर्देश पर किया गया।

कांग्रेस ने कहा कि यदि ऐसी कार्रवाई राजनीतिक नेतृत्व के निर्देश पर हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और संबंधित लोगों को इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने छात्रों को परेशान करना बंद करने और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने की मांग की।

कांग्रेस की यह रिपोर्ट उसके द्वारा किए गए छह जिलों के दौरे और वहां छात्रों, प्रत्यक्षदर्शियों तथा अन्य लोगों से बातचीत पर आधारित है। रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर बिहार सरकार और पुलिस का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।

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