पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित मुकुंदपुर इलाके में मंगलवार शाम तृणमूल कांग्रेस के एक गुट की ओर से निकाले गए विरोध मार्च के दौरान कथित हिंसा के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया। प्रदर्शन स्थानीय पार्टी कार्यालयों पर कथित हमलों और कब्जे की कोशिशों के विरोध में आयोजित किया गया था। इस दौरान पूर्व आईपीएस अधिकारी और टीएमसी नेता हुमायूं कबीर कथित तौर पर घायल हो गए।
मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के एक गुट का कहना है कि, उसके नेता और कार्यकर्ता मार्च निकाल रहे थे, तभी उनका सामना भाजपा समर्थकों से हुआ और दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि जुलूस की रिकॉर्डिंग कर रहे एक कार्यकर्ता के साथ मारपीट की गई, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। टीएमसी नेता उपासना चौधरी ने आरोप लगाया कि जुलूस में शामिल लोगों, जिनमें महिलाएं भी थीं, के साथ धक्का-मुक्की की गई और स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद कई टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूर्व जादवपुर पुलिस थाने ले जाया गया।
बाद में हुमायूं कबीर समेत टीएमसी के अन्य नेता हिरासत में लिए गए पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने पूर्व जादवपुर थाने पहुंचे। कबीर ने आरोप लगाया कि पार्टी नेता वैश्वानर चटर्जी की रिहाई की मांग करते समय थाने के मुख्य गेट के बाहर उनके साथ मारपीट की गई। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने दावा किया कि उन्हें घसीटा गया, जमीन पर गिराया गया और करीब 50 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पीटा गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें काफी चोट लगी और खून बहने लगा।
टीएमसी नेताओं ने कथित हमले की कड़ी निंदा की। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित लोगों ने आईटी सेल प्रमुख उपासना चौधरी के घर और वाहन को निशाना बनाया और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया। सांसद समीरुल इस्लाम ने भी घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वहीं, भाजपा ने राजनीतिक रूप से प्रेरित हमले के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा प्रवक्ता सप्तर्षि चौधरी ने दावा किया कि हिंसा भाजपा द्वारा आयोजित हमले का नतीजा नहीं थी, बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर का विवाद था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग की, ताकि घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों का पता चल सके।
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। दोनों पक्षों ने हिंसा की शुरुआत को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं। मामले में पुलिस जांच के बाद ही घटनाक्रम और कथित मारपीट के लिए जिम्मेदारी को लेकर अधिक स्पष्टता सामने आ सकेगी।

