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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी: छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के एमए उर्दू के छात्र यासिर फहद ने विश्वविद्यालय छात्रसंघ (AMUSU) की बहाली और नए चुनाव कराने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। शुक्रवार को उनकी भूख हड़ताल पांचवें दिन में प्रवेश कर गई।

छात्रों के ज्ञापन के मुताबिक, एएमयू छात्रसंघ का आखिरी चुनाव 2018-19 में हुआ था। इसके बाद करीब आठ वर्षों से विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ नहीं है। छात्रों ने प्रशासन से छात्रसंघ बहाली की प्रक्रिया शुरू करने, चुनाव प्राधिकरण गठित करने, चुनाव कार्यक्रम जारी करने और विश्वविद्यालय के नियमों, यूजीसी के दिशा-निर्देशों तथा लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप चुनाव कराने की मांग की है।

यासिर फहद ने बताया कि 20 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू करने वाले दिन ही उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर निकाले गए मार्च के बाद रात करीब दो बजे उन्हें निलंबन पत्र दिया गया। फहद का दावा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र गतिविधियों और असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है।

फहद ने यह भी आरोप लगाया कि प्रॉक्टोरियल टीम ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश की और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। उनके अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उन्हें कॉलर और जेब से पकड़कर खींचा गया। प्रदर्शन का समर्थन कर रहे छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) की मेडिकल टीम को भूख हड़ताल के दौरान फहद की जांच करने से रोका गया।

हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने फहद के निलंबन के संबंध में अलग पक्ष रखा है। प्रशासन का आरोप है कि फहद ने 14 सितंबर को डक प्वाइंट से बाब-ए-सैयद तक बिना अनुमति “अवैध प्रदर्शन मार्च” आयोजित किया और करीब 10 अन्य लोगों के साथ विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बाधित किया। प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक और मानहानिकारक नारे लगाए गए।

निलंबन आदेश में महिला छात्रों से संबंधित कुछ कथित बयानों का भी उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि फहद ने सोशल मीडिया के जरिए छात्राओं, जिनमें नाबालिग छात्राएं भी शामिल थीं, को प्रदर्शन जारी रखने और प्रशासन से बातचीत न करने के लिए उकसाया। विश्वविद्यालय के मुताबिक, प्रशासन ने 15, 19 और 20 सितंबर को फहद से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

विश्वविद्यालय ने प्रारंभिक जांच के आधार पर फहद के कथित आचरण को एएमयू छात्र आचार एवं अनुशासन नियम, 1985 के तहत प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचार और अनुशासनहीनता बताया है। निलंबन आदेश के मुताबिक, सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना फहद के विश्वविद्यालय परिसर और उससे जुड़े संस्थानों में प्रवेश पर रोक रहेगी।

फहद ने विश्वविद्यालय के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 14 सितंबर को छात्राएं छात्रावासों में खराब भोजन और अस्वच्छ परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं और वह तथा अन्य छात्र उनके समर्थन में वहां मौजूद थे।

पूर्व एएमयू छात्रसंघ नेताओं ने भी छात्रसंघ की बहाली की मांग का समर्थन किया है। पूर्व AMUSU अध्यक्ष सलमान इम्तियाज ने कहा कि छात्रसंघ विश्वविद्यालय जीवन में प्रतिनिधित्व, संवाद, नेतृत्व और छात्रों की भागीदारी का मंच प्रदान करता है। पूर्व AMUSU कैबिनेट सदस्य और मन्नू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मतीन अशरफ ने भी फहद के आंदोलन के समर्थन में छात्रों से आवाज उठाने की अपील की।

पूर्व AMUSU नेता मुस्तफा मुकीत ने कहा कि छात्रसंघ छात्रों की विभिन्न समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है। उनके मुताबिक, छात्रसंघ की बहाली से छात्रों की समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाने का माध्यम मिल सकता है।

एएमयू में छात्रसंघ बहाली की मांग ऐसे समय में उठी है जब देश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी निर्वाचित छात्र निकायों की बहाली को लेकर छात्र अभियान चला रहे हैं। मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) में इस साल छात्रों के आंदोलन के बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। वहीं, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 2006 में छात्रसंघ समाप्त किए जाने के बाद से अब तक छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं।

यासिर फहद ने कहा है कि वह अपनी भूख हड़ताल तब तक जारी रखेंगे जब तक एएमयू प्रशासन छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं करता। उन्होंने कहा कि उनकी मांग विश्वविद्यालय में छात्र नेतृत्व और प्रतिनिधित्व की बहाली को लेकर है।

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