केरल में चुनावी माहौल के बीच “लव जिहाद” को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा उम्मीदवार पीके कृष्णदास की टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाते हुए तिरुवनंतपुरम के जिला कलेक्टर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
बताया जा रहा है कि कट्टाकड़ा में एक चुनावी सभा के दौरान कृष्णदास ने आरोप लगाया था कि अगर एलडीएफ या यूडीएफ सत्ता में आते हैं, तो शासन कुछ खास संगठनों के प्रभाव में चला जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति “लव जिहाद” को बढ़ावा दे सकती है और हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया जा सकता है।
इस बयान के सामने आते ही राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कई संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक माहौल भड़काने वाला बयान बताया। एसडीपीआई की स्थानीय इकाई ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए इसे घृणास्पद भाषण करार दिया है।
चुनाव आयोग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहा है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सफाई देते हुए कहा कि इस तरह के बयान पार्टी की आधिकारिक नीति को नहीं दर्शाते। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी का ऐसा कोई रुख होता, तो वह चुनावी घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से शामिल होता।
हालांकि, पीके कृष्णदास ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा, वह उनकी वैचारिक समझ के अनुरूप है और यदि चुनाव आयोग उनसे स्पष्टीकरण मांगता है तो वे कानूनी रूप से जवाब देंगे।
इस विवाद के बीच अन्य नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं, जिनमें “लव जिहाद” के साथ-साथ “भूमि जिहाद” और “व्यापार जिहाद” जैसे आरोपों का जिक्र किया गया है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान केरल की सामाजिक और धार्मिक सद्भावना को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल, सभी की नजर चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई और रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

