महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नगर निगम ने बुधवार को Matin Patel के घर, कार्यालय और दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई करते हुए कथित अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मतीन पटेल का नाम टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक इकाई से जुड़े हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में सामने आया है।
पुलिस के अनुसार, मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि मतीन पटेल ने उसे अपने यहां शरण दी थी।
इसके बाद 9 मई को नगर निगम ने नारेगांव इलाके में कथित अवैध निर्माणों को लेकर पटेल को नोटिस जारी किया और 72 घंटे के भीतर जवाब मांगा।
पटेल ने तोड़फोड़ पर रोक लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। बुधवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीमों ने उनके घर, कार्यालय और दुकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी।
महापौर Sameer Rajurkar ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद मतीन पटेल की पार्षद सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के तहत उम्मीदवारों को नामांकन के समय पूरी जानकारी देना अनिवार्य है और तथ्य छिपाने पर अयोग्यता हो सकती है।
इस कार्रवाई की All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।
पार्टी के पूर्व सांसद Imtiaz Jaleel ने मंगलवार रात पटेल के परिवार से मुलाकात की और नगर निगम की “जल्दबाजी” पर सवाल उठाए। उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी मतीन पटेल के परिवार के लिए फिर से ऐसा घर बनाएगी जिसे “पूरा देश याद रखेगा।”
यह पूरा मामला Tata Consultancy Services की नासिक इकाई में कथित छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार की शिकायतों से जुड़ा हुआ है। एक विशेष जांच दल (SIT) फिलहाल ऐसे नौ मामलों की जांच कर रहा है। मुख्य आरोपी निदा खान पर धर्म परिवर्तन कराने और महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
टीसीएस ने इस मामले में “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने की बात कही है और आरोपों में शामिल कर्मचारियों को निलंबित करने की जानकारी दी है। वहीं विपक्षी नेताओं और स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि बुलडोजर कार्रवाई का समय और मकसद क्या राजनीतिक दबाव से जुड़ा हुआ है।

