ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा मुसलमानों के खिलाफ दिए गए कथित भड़काऊ और ज़हरीले बयानों की कड़ी निंदा की है।
बोर्ड ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेने की मांग की है।
बोर्ड ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान न केवल मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले हैं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ हैं।
AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने कहा कि राजनीतिक सत्ता में बैठे लोगों द्वारा इस तरह की बयानबाज़ी बेहद चिंताजनक है और इससे समाज में नफरत को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रेस बयान के अनुसार, असम के मुख्यमंत्री ने तिनसुकिया में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर “मियान” समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न की बात कही और उन्हें असम छोड़ने के लिए मजबूर करने जैसी टिप्पणी की। साथ ही, उन्होंने फॉर्म नंबर 7 के ज़रिए 4 से 5 लाख मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने और उनके आर्थिक बहिष्कार की बात भी कही।
AIMPLB ने कहा कि यह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा खुला भेदभाव, उत्पीड़न और नागरिक अधिकारों से वंचित करने की वकालत है, जो कानून के शासन और समानता के सिद्धांतों पर सीधा हमला है।
बोर्ड ने राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। AIMPLB ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सामाजिक अशांति और अराजकता को बढ़ावा मिल सकता है।
साथ ही, बोर्ड ने असम के मुसलमानों से शांति बनाए रखने और केवल संवैधानिक व कानूनी तरीकों से ही जवाब देने की अपील की है।

