Journo Mirror
Uncategorized

गाजा में 96% बच्चों को लगता है कि उनकी मौत निकट है: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ने गाजा में बच्चों और युवाओं की भयावह मानसिक स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में करीब 96% बच्चों को लगता है कि उनकी मौत कभी भी हो सकती है, जो वहां के हालात की गंभीरता को दर्शाता है।

यूएनएफपीए की अधिकारी सीमा अलामी ने बताया कि लंबे समय से जारी संघर्ष ने बच्चों और युवाओं को “गंभीर मानसिक स्वास्थ्य आपातकाल” की स्थिति में पहुंचा दिया है।

आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 61% किशोर PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) से, 38% अवसाद और 41% चिंता से जूझ रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हर पांच में से एक वयस्क लगभग रोज़ आत्महत्या के विचारों से गुजरता है, जो लगातार भय और असुरक्षा के माहौल का नतीजा है।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर लड़कियों पर पड़ रहा है। गाजा में बाल विवाह के मामलों में फिर से तेजी आई है। पहले जहां 2022 में यह दर घटकर 11% हो गई थी, अब गरीबी, विस्थापन और असुरक्षा के कारण परिवार फिर से कम उम्र में बेटियों की शादी करने को मजबूर हो रहे हैं।

यूएनएफपीए के अध्ययन के अनुसार, 71% लोगों ने बताया कि 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी के लिए दबाव बढ़ा है। हाल के समय में ही 14 से 16 वर्ष की लड़कियों के लिए 400 से अधिक विवाह लाइसेंस जारी किए गए।

2025 में गाजा में दर्ज गर्भधारण में से लगभग 10% किशोरियों के बीच थे, जो युद्ध से पहले के स्तर से काफी ज्यादा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद खराब हो चुकी है—केवल 15% स्वास्थ्य केंद्र ही आपातकालीन प्रसूति सेवाएं देने में सक्षम हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कम उम्र में शादी करने वाली 63% लड़कियों को शारीरिक, मानसिक या यौन हिंसा का सामना करना पड़ा। कई मामलों में आत्महत्या या उसके प्रयास भी सामने आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल मानवीय संकट नहीं बल्कि एक गहरा सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिसे तुरंत वैश्विक ध्यान और सहायता की जरूरत है।

Related posts

Leave a Comment