सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते हेट स्पीच मामलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत का इरादा हर छोटी घटना पर न तो कानून बनाने का है और न ही उसकी निगरानी करने का।
अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को हेट स्पीच से परेशानी है तो वह पुलिस या संबंधित हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है।
यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पत्रकार कुर्बान अली और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि 2018 और 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हेट क्राइम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार और पुलिस को सक्रिय कदम उठाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने पहले भी कहा है कि धर्म के आधार पर नफरत फैलाने की किसी भी कोशिश के लिए भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में कोई जगह नहीं है।
द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक़, वकील निज़ाम पाशा ने सुनवाई के दौरान असम के एक मंत्री का उदाहरण दिया, जिन्होंने बिहार चुनाव के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में 1989 के भागलपुर दंगों से जुड़े एक विवादित प्रतीक का संदर्भ दिया था। इस पर अदालत ने कहा कि जिस राज्य से समस्या हो, याचिकाकर्ता वहां की अदालत में उचित कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
अदालत ने कहा कि देशभर की हर छोटी-बड़ी घटना की निगरानी अदालत के लिए संभव नहीं है। सरकार और प्रशासन को ही हेट स्पीच पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

