अमेरिका के प्रतिष्ठित अख़बार The New York Times ने 26 दिसंबर 2025 को भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में RSS का प्रभाव केवल सामाजिक संगठनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति, शिक्षा और सरकारी संस्थानों तक फैलता हुआ दिखाई देता है।
NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, RSS की स्थापना 1925 में हुई थी और अब संगठन अपने 100 वर्षों की यात्रा पूरी कर चुका है। अख़बार का दावा है कि यह संगठन हिंदुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने वाला एक व्यापक नेटवर्क बन चुका है, जिसका असर भारत की नीतियों और सार्वजनिक जीवन पर देखा जा सकता है। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और RSS से उनके पुराने संबंधों का भी ज़िक्र किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हिंदू पहचान और राष्ट्रवाद को लेकर नीतिगत फैसलों में बदलाव देखने को मिले हैं। NYT के अनुसार, आलोचकों का मानना है कि इससे भारत की संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर असर पड़ा है, जबकि समर्थक इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखते हैं।
हालांकि, इस रिपोर्ट को लेकर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। RSS से जुड़े और सरकार समर्थक कई संगठनों व मीडिया संस्थानों ने NYT की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और भारत की सामाजिक संरचना को गलत तरीके से पेश करने वाला बताया है। उनका कहना है कि RSS एक स्वयंसेवी संगठन है, न कि कोई गुप्त राजनीतिक शक्ति।
कुल मिलाकर, न्यूयॉर्क टाइम्स की यह रिपोर्ट भारत की राजनीति और समाज को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस को दर्शाती है। RSS और हिंदुत्व को लेकर देश के भीतर और बाहर विचारों का टकराव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

