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जामिया मिलिया इस्लामिया में ‘कुरान और विज्ञान’ पर हुआ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, बोले- कुरान सामाजिक सद्भाव के लिए शाश्वत मार्गदर्शन प्रदान करता है

जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) में कुरान और विज्ञान पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन बुधवार, 28 जनवरी 2026 को दोपहर 2:30 बजे डॉ. एम.ए. अंसारी सभागार में किया गया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य कुरान की शिक्षाओं और समकालीन वैज्ञानिक चिंतन के बीच संबंधों की पड़ताल करना है, जिसमें भारत और विदेश के विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों की भागीदारी हो रही है।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत पवित्र कुरान के पाठ से हुई। इसके बाद विशिष्ट अतिथियों को फूलों के गुलदस्ते, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। प्रोफेसर जुनैद हारिस ने अतिथियों का परिचय कराया, जबकि प्रोफेसर शाहिद ने स्वागत भाषण देते हुए धर्म और आधुनिक ज्ञान प्रणालियों के बीच निरंतर संवाद के महत्व पर जोर दिया।

सभा को संबोधित करते हुए मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU), हैदराबाद के पूर्व कुलपति डॉ. असलम परवेज़ ने सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि धर्म केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है और पवित्र कुरान बार-बार मनुष्य को अपनी बुद्धि और इंद्रियों के उपयोग के लिए प्रेरित करता है।

कुरान के उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करते, वे अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रह्मांड दैवीय नियमों के अनुसार कार्य करता है और मानवता को इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।

कुवैत के इंजीनियर मुस्तफा अब्बास ने तकनीकी विकास के दौर में कुरान की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पवित्र कुरान आज भी व्यक्तिगत विकास और सामाजिक सद्भाव के लिए शाश्वत मार्गदर्शन प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग यातायात नियमों का पालन करते हैं, उसी तरह कुरान के नैतिक सिद्धांतों को भी जीवन में अपनाया जाना चाहिए।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और समकालीन चुनौतियाँ
पूर्व ईरानी राष्ट्रपति शहीद इब्राहिम रईसी की पत्नी प्रोफेसर जमीलेह अलमोलहोदा ने कहा कि कुरान के बारे में बढ़ती गलतफहमियों को दूर करने के लिए ऐसे सम्मेलनों की अत्यंत आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कुरान के अपमान की घटनाएं अज्ञानता को दर्शाती हैं। उन्होंने पारिवारिक मूल्यों के कमजोर होने पर चिंता जताते हुए कहा कि नैतिक आधार के बिना पश्चिमी विचारधाराओं को अपनाना सामाजिक स्थिरता के लिए चुनौती बन रहा है।

उन्होंने जोर दिया कि कुरान का ज्ञान इन समस्याओं से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है।

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