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हवाई अड्डे के पास अस्थायी मस्जिद बनाने पर विचार करें: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दी सलाह

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई हवाई अड्डे के घरेलू टर्मिनल के पास अस्थायी प्रार्थना स्थल की अनुमति देने के मुद्दे पर Mumbai Metropolitan Region Development Authority को मानवीय आधार पर विचार करने की सलाह दी है।

न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदोष पूनीवाला की खंडपीठ ने प्राधिकरण को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला टैक्सी-रिक्शा, ओला-उबर चालक संघ द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। संघ का कहना है कि हवाई अड्डे परिसर में लगभग 30 वर्षों से एक अस्थायी शेड प्रार्थना स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां प्रतिदिन करीब 2,000 लोग नमाज़ अदा करते थे। रमज़ान के दौरान वहीं सेहरी और इफ्तार की व्यवस्था भी होती थी। संघ के अनुसार, इस शेड को बिना पूर्व सूचना के 5 अप्रैल 2025 को ध्वस्त कर दिया गया।

याचिका में बताया गया है कि पहले यह स्थल हवाई अड्डे के एक हिस्से में था, लेकिन बाद में इसे स्थानांतरित किया गया। नए स्थान पर बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा प्रबंधों की कमी की शिकायत की गई। संघ ने कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखे, परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में पता चला कि एक शिकायत के आधार पर ढांचा हटाया गया।

संघ का कहना है कि इस कार्रवाई से हजारों कामकाजी लोगों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हवाई अड्डे की सीमा के भीतर अन्य पूजा स्थल मौजूद हैं, जिन्हें यथावत रखा गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि या तो उसी स्थान पर शेड का पुनर्निर्माण कराया जाए या फिर कोई उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल बहाली का आदेश नहीं दिया, लेकिन प्राधिकरण को मानवीय दृष्टिकोण से मामले पर विचार करने और एक सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई की जाएगी। फिलहाल, इस स्थल का उपयोग करने वाले हजारों चालक और यात्री न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

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