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केरल सरकार और मुस्लिम लीग का बड़ा कदम: वायनाड भूस्खलन पीड़ितों को सौंपे 229 मकान

लगभग दो वर्ष पहले केरल के वायनाड जिले में आए विनाशकारी भूस्खलन के बाद पुनर्वास कार्य में बड़ी प्रगति हुई है। केरल सरकार ने कालपेट्टा में बनाए गए पुनर्वास नगर में पहले चरण के तहत 178 परिवारों को मकानों के स्वामित्व पत्र सौंपे।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 299 करोड़ रुपये की इस परियोजना के अंतर्गत लाभार्थियों को अधिकार पत्र प्रदान किए। यह पुनर्वास नगर चूरलमला और मुंडक्कई जैसे सबसे अधिक प्रभावित गांवों से लगभग 20 किलोमीटर दूर 64 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया गया है।

परियोजना के अंतर्गत कुल 410 मकान बनाए जाने हैं, जिनमें लगभग 1,600 लोगों को बसाने की योजना है। पहले चरण में तैयार 178 मकानों का उद्घाटन किया गया। प्रत्येक मकान लगभग 1,000 वर्ग फुट क्षेत्रफल का एक मंजिला घर है, जो लगभग 3,049 वर्ग फुट भूमि पर निर्मित है। मकानों का निर्माण वायनाड की भौगोलिक स्थिति और जलवायु को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

प्रत्येक घर में एक मुख्य शयनकक्ष, दो अतिरिक्त कक्ष, बैठक कक्ष, अध्ययन कक्ष, भोजन कक्ष, रसोईघर, भंडारण कक्ष और बरामदा शामिल है।

भविष्य में आवश्यकता होने पर एक और मंजिल बनाने की व्यवस्था भी रखी गई है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि यह केवल मकान वितरण नहीं, बल्कि राज्य की सामूहिक एकजुटता और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और सहायता में आई चुनौतियों के बावजूद पूरा केरल प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा रहा। उन्होंने इसे राज्य की एकता और मानवीय मूल्यों का उदाहरण बताया।

इसी क्रम में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी अपने पुनर्वास अभियान के पहले चरण में 51 मकान प्रभावित परिवारों को सौंपे। राज्य अध्यक्ष पानक्कड़ सैयद सादिकली शिहाब थंगल ने वेल्लिथोडे में आयोजित कार्यक्रम में लाभार्थियों को चाबियां प्रदान कीं।

शारदा नामक महिला को सबसे पहले मकान की चाबी सौंपी गई। वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा मिलकर किए गए पुनर्वास प्रयासों की सराहना की और इसे मानवीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

जुलाई 2024 में आए भूस्खलन में 298 लोगों की जान चली गई थी, 59 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए थे और सैकड़ों घर रहने योग्य नहीं बचे थे। आपदा के तुरंत बाद 728 परिवारों के 2,569 लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया था। बाद में सरकार ने किराए के मकानों में स्थानांतरण की व्यवस्था की और किराया राज्य कोष से वहन किया।

आजीविका सहायता के तहत सैकड़ों परिवारों को मासिक आर्थिक मदद दी जा रही है, जबकि अनाथ हुए बच्चों को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। साथ ही 858 परिवारों को प्रतिमाह खाद्य कूपन भी दिए जा रहे हैं।

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