मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक दलित परिवार ने जातिगत हिंसा और पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई है।
हमले में घायल परिवार के सदस्यों ने जिला अस्पताल में ही प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग की और चेतावनी दी कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे सामूहिक आत्महत्या की अनुमति मांगेंगे।
घटना की शुरुआत 26 फरवरी को दासिया गांव में चने की फसल को लेकर हुए विवाद से हुई। पीड़ित प्रेमचंद मोगिया ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी बेटी के साथ मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं।
परिवार का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाही तो एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई, जिसके चलते उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ा।
पीड़ित परिवार के अनुसार, शिकायत के बाद 15 मार्च को आरोपियों ने दोबारा हमला किया, जिसमें प्रेमचंद, उनकी पत्नी और बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल सभी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है, जहां उन्होंने तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। तख्तियों पर “दलितों पर अत्याचार बंद करो” और “हमें न्याय दो या मरने दो” जैसे नारे लिखे हुए थे।
परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है और शुरुआत में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं नहीं लगाई गईं। वहीं पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हमले के बाद विधिवत एफआईआर दर्ज की गई और आवश्यक धाराएं जोड़ी गई हैं।
पीड़ित परिवार ने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव से निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है और अब उन्हें केवल न्याय की उम्मीद है।

