पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भाबानीपुर में विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, हटाए गए मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी असामान्य रूप से अधिक बताई जा रही है।
कोलकाता स्थित शोध संस्था साबर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, भाबानीपुर में कुल मतदाताओं में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 20% है, लेकिन हटाए गए 3,875 मतदाताओं में से 1,554 मुस्लिम हैं, जो करीब 40.1% बैठता है। इस आंकड़े को लेकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
यह पूरा मामला भारतीय चुनाव आयोग द्वारा 28 फरवरी को जारी की गई संशोधित मतदाता सूची के बाद सामने आया। आंकड़ों के अनुसार, पहले 14,113 नामों को जांच के दायरे में रखा गया था, जिनमें से बाद में 3,875 नाम हटा दिए गए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कई नाम मामूली कारणों जैसे वर्तनी की गलती या पारिवारिक विवरण के आधार पर हटाए गए।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों—खासकर मुस्लिम और मतुआ—को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे सत्तारूढ़ दल को कम समर्थन देते हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्यभर में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
राजनीतिक रूप से अहम भाबानीपुर सीट पर इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है, जहां बनर्जी का सामना सुवेंदु अधिकारी से होने की संभावना है। गौरतलब है कि 2021 के उपचुनाव में बनर्जी ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन हाल के चुनावों में मुकाबला कड़ा होता दिख रहा है।
वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को शिकायत दी है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी जमीनी सत्यापन के बजाय एल्गोरिदम के जरिए किया गया, जिससे निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। ऐसे में मतदाता सूची को लेकर उठे ये सवाल चुनावी माहौल को और गर्मा सकते हैं।

