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यूपी पुलिस और STF पर अवैध कार्रवाई के आरोप: पीड़ित परिवार भी आए सामने

राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को Press Club of India में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देशभर के चिंतित नागरिकों, वकीलों, प्रोफेसरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने Uttar Pradesh Police और उसकी Special Task Force (STF) पर अवैध कार्रवाई, अपहरण, बिना वारंट छापे और सुप्रीम कोर्ट के गिरफ्तारी दिशानिर्देशों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि 11 अप्रैल को Botanical Garden Metro Station से चार एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के बाद, यूपी STF ने देशभर में छापेमारी और गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू किया, जिसमें कानूनी प्रक्रियाओं और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गई।

आरोप है कि दिल्ली में बिना वारंट कई लोगों को हिरासत में लिया गया, निजी घरों पर छापे मारे गए और लोगों को पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित किया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद ने दावा किया कि उनके भाई को पहले “मीडिया ट्रायल” के जरिए आरोपी बताया गया और फिर कथित रूप से अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाकर प्रताड़ित किया गया।

सामाजिक कार्यकर्ता वरुणी ने बताया कि रोहिणी सेक्टर-28 स्थित एक घर से उन्हें सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने बिना वारंट उठाया, मोबाइल और अन्य सामान जब्त किया और देर रात तक पूछताछ की।

उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली में दूसरे राज्य की पुलिस किस अधिकार से इस तरह की कार्रवाई कर रही है और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार कैसे हो रहा है।

एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता नौरीन सब्बा ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उनके साथ सांप्रदायिक टिप्पणियां की गईं और उनकी पहचान को लेकर सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि उन्हें “बांग्लादेशी” कहकर संबोधित किया गया और उनके शिक्षण कार्य को लेकर भी संदेह जताया गया।

प्रोफेसर Nandita Narayan और सामाजिक कार्यकर्ता John Dayal सहित अन्य वक्ताओं ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि यह नागरिक अधिकारों और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है। उनका कहना था कि श्रमिक आंदोलनों को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र संगठनों—AISA, DSF, AIDSO, KYS और NSUI—ने भी इन आरोपों पर चिंता जताई और कार्रवाई की मांग की। आयोजकों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर National Human Rights Commission सहित विभिन्न आयोगों को ज्ञापन भी सौंपा गया है।

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