महाराष्ट्र के मुस्लिम संगठनों, नागरिक समाज समूहों, विधायकों, कानूनी विशेषज्ञों और सामुदायिक नेताओं ने घृणा अपराधों के पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने तथा मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर कानूनी और सामाजिक स्तर पर समन्वित कार्रवाई करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है।
यह फैसला 8 जून को मुंबई के इस्लाम जिमखाना में आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान लिया गया। बैठक का आयोजन फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स (FMM) ने किया था, जिसमें मुस्लिम विधायक, पूर्व न्यायाधीश, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और धार्मिक विद्वानों ने भाग लिया।
बैठक में घृणा अपराध, घृणास्पद भाषण, महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता (धर्मांतरण विरोधी) कानून, प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) और अल्पसंख्यक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी सहायता तंत्र को मजबूत करने और जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जमात-ए-इस्लामी महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना इलियास खान फलाही ने कहा कि प्रस्तावित टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य घृणा अपराधों के पीड़ितों को तत्काल कानूनी और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना होगा।
वहीं, न्याय एवं शांति आयोग (JPC) और इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिटी रिसर्च एंड ऑर्गनाइजेशन (ICOR) से जुड़ी डॉल्फी डिसूजा ने बताया कि लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
बैठक में शामिल लोगों ने बढ़ती सांप्रदायिकता और प्रशासनिक भेदभाव के खिलाफ संगठित प्रतिक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए 10 वर्षीय दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मौलाना फलाही ने कहा, “यह पहल किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि मुस्लिम समुदाय के सामने मौजूद समस्याओं के व्यावहारिक और स्थायी समाधान तलाशने का एक ईमानदार प्रयास है।”
बैठक में पूर्व बॉम्बे हाई कोर्ट न्यायाधीश अभय थिप्से, विधायक अमीन पटेल, साजिद पठान, हारून खान, अबू आसिम आज़मी, रईस शेख तथा पूर्व राज्यसभा सदस्य उबैदुल्लाह खान आज़मी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
बैठक के अंत में फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने अल्पसंख्यक समुदायों से मतदाता सूची में अपने नाम सुनिश्चित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की अपील भी की।

