दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बुधवार तड़के दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-II में स्थित दरगाह पंच पीरान पर बुलडोजर कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त कर दिया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई को लेकर इलाके में तनाव का माहौल बन गया। डीडीए ने दावा किया कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर “अवैध अतिक्रमण” था, जबकि दरगाह के रखवालों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह 100 साल से अधिक पुराना धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल था।
डीडीए अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं और धार्मिक समिति से मंजूरी भी ली गई थी। प्राधिकरण का कहना है कि 2024 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिलने के बाद विध्वंस अभियान चलाया गया।
डीडीए के प्रवक्ता ने कहा कि सरकारी जमीन पर बने अनधिकृत निर्माण के खिलाफ यह जरूरी कार्रवाई थी। वहीं दूसरी ओर दरगाह के रखवालों ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं। दरगाह से जुड़े मकबूल हसन ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त नोटिस और न्यायिक प्रक्रिया पूरी किए सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच कार्रवाई शुरू कर दी।
उनका कहना है कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस दरगाह की देखभाल करती आ रही थीं और यह क्षेत्र की एक पुरानी धरोहर मानी जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध करने पर गिरफ्तार करने की धमकी दी।
कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें मौके से हटा दिया।
अधिकारियों का दावा है कि केवल चिन्हित अतिक्रमण वाले हिस्से को ही हटाया गया और आसपास की अन्य संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि दरगाह के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया।
मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। दरगाह के रखवालों की ओर से वकीलों ने उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस और डीडीए को कानूनी नोटिस भेजते हुए आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है। नोटिस में कहा गया है कि दशकों से मौजूद धार्मिक स्थल को बिना अंतिम कानूनी निर्णय के ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए था।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है, जबकि डीडीए अपने कदम को पूरी तरह कानूनी और नियमों के अनुरूप बता रहा है।

