कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खर्गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोलते हुए उसे “भारत के इतिहास का सबसे राष्ट्रविरोधी संगठन” बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस को कानूनी रूप से पंजीकरण कराना चाहिए और यदि संगठन ऐसा नहीं करता है तो कर्नाटक सरकार इसके लिए कानून बनाने पर विचार कर सकती है।
दिल्ली में आयोजित “आरएसएस का पंजीकरण क्यों आवश्यक है” विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए खर्गे ने आरोप लगाया कि आरएसएस खुद को सबसे बड़ा देशभक्त संगठन बताता है, जबकि दूसरों की देशभक्ति पर सवाल उठाता रहता है। उन्होंने कहा, “जो संगठन दूसरों को देशभक्ति का प्रमाणपत्र देता है, उसका अपना इतिहास विवादों से भरा रहा है।”
प्रियांक खर्गे ने बताया कि गृह मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन का पंजीकरण कराने का आग्रह किया था, लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस बिना पंजीकरण के काम जारी रखता है तो कर्नाटक सरकार इसे कानूनी दायरे में लाने के लिए नया कानून ला सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कानून का पालन नहीं करने पर प्रतिबंध सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अपने संबोधन में खर्गे ने आरोप लगाया कि आरएसएस ने इतिहास में भारतीय संविधान और तिरंगे का विरोध किया था। उन्होंने दावा किया कि संगठन ने संविधान के खिलाफ कई प्रदर्शन आयोजित किए थे। हालांकि, इन आरोपों पर आरएसएस की ओर से पहले भी असहमति जताई जाती रही है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी कहा कि आरएसएस की कानूनी स्थिति पर बहस एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न है और इस पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
वहीं, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहले इस मांग को खारिज करते हुए कहा था कि संघ कोई गुप्त संगठन नहीं है और वह खुले तौर पर कार्य करता है। उन्होंने पंजीकरण की मांग को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा था कि देश में कई संस्थाएं बिना पंजीकरण के भी कार्यरत हैं और आरएसएस इस तरह के राजनीतिक आरोपों का पहले भी सामना करता रहा है।

