कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीजेपी एमएलसी एन. रविकुमार की उस कथित टिप्पणी पर कड़ी नाराज़गी जताई है, जिसमें उन्होंने कलबुर्गी की डिप्टी कमिश्नर और आईएएस अधिकारी फौजिया तरानुम को कथित तौर पर “पाकिस्तान से” बताया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी व्यक्ति के मुस्लिम होने मात्र से उसे पाकिस्तानी नहीं कहा जा सकता।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने रविकुमार की ओर से अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी की कि फौजिया तरानुम कर्नाटक कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि किसी अधिकारी के धर्म को आधार बनाकर इस तरह की टिप्पणी कैसे की जा सकती है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, “सिर्फ इसलिए कि वह मुस्लिम हैं, आप उन्हें ‘पाकिस्तान से’ नहीं कह सकते। वह कर्नाटक राज्य की आईएएस अधिकारी हैं।”
यह मामला मई 2025 में कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालवादी नारायणस्वामी की कथित गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित ‘कलबुर्गी चलो’ प्रदर्शन से जुड़ा है। रविकुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान डिप्टी कमिश्नर फौजिया तरानुम के खिलाफ आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणी की थी।
रविकुमार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान केवल इतना कहा था कि “सभी पुलिस अधिकारी प्रभारी मंत्री के गुलाम हैं” और उन्होंने सांप्रदायिक टिप्पणी करने से इनकार किया।
मामले में कलबुर्गी के एक निवासी की शिकायत के बाद पुलिस ने रविकुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a)(b) और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया था।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राजनीतिक नेताओं के सार्वजनिक बयानों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि नेताओं को जनता को संबोधित करते समय जिम्मेदारी और संयम बरतना चाहिए तथा सांप्रदायिक या भड़काऊ टिप्पणियों से बचना चाहिए।
न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को व्यक्तिगत हमलों और कीचड़ उछालने के बजाय ऐसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो आम जनता के कल्याण से जुड़े हों।
अदालत ने यह भी कहा कि गैर-जिम्मेदाराना सार्वजनिक बयानों के कारण आपराधिक अदालतों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है, जिससे हत्या और जबरन वसूली जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।

