केरल के पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता रेजाज एम. शीबा सईदीक की रिहाई की मांग को लेकर ‘फ्री रेजाज’ अभियान तेज हो गया है। 27 वर्षीय रेजाज ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत नागपुर जेल में 500 दिन पूरे कर लिए हैं। उनके दोस्तों, सहकर्मियों और समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ अभियान तेज करते हुए स्वतंत्र पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता को अपराध नहीं मानने की मांग की है।
रेजाज को 7 मई 2025 को नागपुर के एक होटल से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन पर प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से कथित संबंधों के आरोप में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया। वह इस मामले में एकमात्र आरोपी बताए जा रहे हैं और फिलहाल नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है।
मामले में जांच एजेंसियों की ओर से रेजाज के सोशल मीडिया पोस्ट और फिलिस्तीन के समर्थन में उनकी सक्रियता को भी आरोपों के आधार के तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, उनके समर्थकों का कहना है कि स्वतंत्र पत्रकारिता, सोशल मीडिया पर विचार व्यक्त करना और फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठाना किसी व्यक्ति को हिंसक गतिविधि या प्रतिबंधित संगठन से जोड़ने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
‘फ्री रेजाज’ अभियान से जुड़े लोगों का आरोप है कि मामले में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और ऐसा कोई ठोस सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है जो रेजाज को किसी हिंसक गतिविधि से जोड़ता हो। उनका कहना है कि रेजाज ने पत्रकार और कार्यकर्ता के रूप में काम किया है और उनकी गिरफ्तारी असहमति की आवाजों तथा स्वतंत्र पत्रकारिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
रेजाज की गिरफ्तारी को लेकर उनके दोस्तों, सहकर्मियों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने उनकी तत्काल रिहाई और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया की मांग की है। समर्थकों का कहना है कि 500 दिनों से जेल में बंद रेजाज के मामले में अब उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की पारदर्शी तरीके से समीक्षा की जानी चाहिए।

