नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूचियों में सामने आई कथित अनियमितताओं पर गंभीर चिंता जताते हुए मांग की है कि इन समस्याओं का समाधान किए बिना आगामी विधानसभा चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए। संगठन ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करना जरूरी है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
जमाअत की मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के सचिव नदीम खान ने कहा कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में SIR से पहले मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 18.71 करोड़ थी, जो अंतिम मतदाता सूची में घटकर 16.43 करोड़ रह गई। इस तरह करीब 2.29 करोड़ यानी 12.2 प्रतिशत मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। उनके मुताबिक, इस कमी में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश का है, जहां करीब 2.04 करोड़ मतदाताओं की संख्या कम हुई है।
नदीम खान ने कहा कि पंजाब में करीब 14 लाख, उत्तराखंड में 8 लाख, मणिपुर में 1.3 लाख और गोवा में 1.27 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आचरण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा की जाए, गलती से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े जाएं और नाम हटाने, जोड़ने तथा आपत्तियों के निपटारे से संबंधित राज्यवार आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार से असहमति रखने वालों के खिलाफ आपराधिक मामलों और जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष और समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने वरिष्ठ नेता आजम खान का मामला उठाते हुए कहा कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और उनके द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को भी सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आजम खान को जमानत मिलने के कुछ ही मिनटों बाद प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दोबारा गिरफ्तार किए जाने का जिक्र करते हुए जांच एजेंसियों की कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
इसके अलावा जमाअत ने आगामी सर्दियों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से समय रहते राहत की तैयारियां करने की अपील की। प्रो. सलीम इंजीनियर ने रैन बसेरों का विस्तार करने, वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने, जरूरतमंदों को कंबल, गर्म कपड़े और भोजन मुहैया कराने तथा संवेदनशील इलाकों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जमाअत अपने सहयोगी संगठनों के साथ सर्दियों में जरूरतमंद लोगों की सहायता करती है और इस काम में धर्म, जाति या पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
जमाअत ने बढ़ते वायु प्रदूषण पर भी चिंता जताते हुए सरकारों से निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, कचरा जलाने और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर सख्ती से नियंत्रण करने की मांग की। संगठन ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए समय रहते स्वास्थ्य सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए।

