उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने राज्य में मदरसों की जांच और निगरानी को तेज कर दिया है। हरिद्वार जिले के 23 मदरसों की सरकारी फंडिंग फिलहाल रोक दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान रिकॉर्ड, उपस्थिति और संचालन से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग कर नए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के फैसले के बाद की गई है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
हरिद्वार प्रशासन के अनुसार, सरकारी पोषण योजना से जुड़े 131 मदरसों की जांच की गई। जिला शिक्षा अधिकारी अमित नंद ने बताया कि समीक्षा बैठक में 121 मदरसा संचालकों ने हिस्सा लिया, जबकि 10 संस्थानों ने योजना से बाहर होने की इच्छा जताई।
जांच में अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ मदरसों ने भोजन संबंधी दैनिक जानकारी अपलोड नहीं की, कई संस्थानों में रिकॉर्ड अधूरे पाए गए और कुछ जगह छात्रों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई।
प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने 23 मदरसों की मार्च और अप्रैल की फंडिंग रोक दी है, जबकि बाकी संस्थानों को योजना का लाभ जारी रहेगा।
इस बीच, राज्य कैबिनेट ने “उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियमावली 2026” को मंजूरी दे दी है। नए नियमों के तहत सभी मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। यह मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों तक वैध रहेगी।
सरकार ने कहा है कि 1 जुलाई 2026 के बाद केवल मान्यता प्राप्त मदरसे ही राज्य में संचालित हो सकेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

