गुजरात के मेहसाणा जिले के मडी गांव में एक दलित दूल्हे की शादी की बारात को कथित तौर पर बीच रास्ते में रोक दिया गया। आरोप है कि कुछ उच्च जाति के लोगों ने दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने का विरोध किया और उसके साथ मारपीट की। यह घटना 10 मई की सुबह गांव की डेयरी के पास हुई।
पीड़ित परिवार के अनुसार, दूल्हे मयंक रावत और उनके परिजनों को जातिसूचक गालियां दी गईं। शिकायतकर्ता भाविक रावत ने बताया कि आरोपियों ने कहा कि घोड़े पर सवारी करना “दरबार समुदाय का अधिकार” है और बारात को आगे बढ़ने से रोकने की धमकी दी।
घटना के बाद शादी समारोह में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बारात को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। मामले की शिकायत मिलने के बाद विजयपुर तालुका की लाडोल पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को दलित समुदाय के खिलाफ जारी सामाजिक भेदभाव का उदाहरण बताया है।
उनका कहना है कि संविधान द्वारा समानता का अधिकार दिए जाने के बावजूद आज भी कई जगहों पर दलित दूल्हों को घोड़ी चढ़ने, डीजे बजाने या ऊंची जाति के इलाकों से बारात निकालने पर विरोध का सामना करना पड़ता है।
हाल के महीनों में देश के कई राज्यों से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात के अन्य जिलों में भी दलित दूल्हों पर हमले और बारात रोकने के मामले दर्ज किए गए हैं।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि ये घटनाएं समाज में अब भी मौजूद गहरे जातिगत भेदभाव को दिखाती हैं।

