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कुरआन शांति और सद्भाव का शाश्वत घोषणापत्र है: मौलाना असग़र अली

कुरआन शांति और सद्भाव का शाश्वत घोषणापत्र है: मौलाना असग़र अली

केंद्रीय जमीयत अहले हदीस हिंद की ओर से आयोजित 22वीं अखिल भारतीय कुरआन हिफ़्ज़, तजवीद एवं तफ़्सीर प्रतियोगिता शानदार सफलता के साथ संपन्न हुई। दो दिवसीय इस प्रतियोगिता में देशभर के करीब 150 मदरसों, जामिआत, कॉलेजों और शैक्षिक संस्थानों के 670 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। समापन समारोह में देश की कई प्रमुख शैक्षिक और धार्मिक हस्तियां शामिल हुईं।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय जमीयत अहले हदीस हिंद के अमीर मौलाना असग़र अली इमाम मेहदी सलफ़ी ने कहा कि कुरआन-ए-करीम देश और पूरी मानवता के लिए शांति एवं सद्भाव का शाश्वत घोषणापत्र है। यदि इसकी शिक्षाओं को वास्तविक रूप से अपनाया जाए और इसके संदेश को जीवन में उतारा जाए तो दुनिया में शांति, भाईचारे, सांप्रदायिक सौहार्द और सहिष्णुता को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियों के बीच मानवता को कुरआन की शिक्षाओं की ओर लौटने और उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाने की जरूरत है।

मौलाना सलफ़ी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुरआन और सुन्नत की शिक्षाओं को समझना और उन पर अमल करना जरूरी है। उन्होंने मदरसों को इस्लाम की मजबूत बुनियाद और मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से अपने संस्थानों का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुरआन को याद करने के साथ-साथ उसकी शिक्षाओं, नैतिक मूल्यों, धैर्य और सहनशीलता को भी अपने व्यवहार में शामिल करना चाहिए। कुरआन की तफ़्सीर में सुन्नत-ए-नबवी को समझना भी बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम में जमीयत के महासचिव मौलाना मुहम्मद हारून सलफ़ी ने स्वागत भाषण दिया। वहीं, प्रोफेसर अख्तरुल वासे, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ, प्रोफेसर सैयद फारूक, प्रोफेसर जुनैद हारिस और अन्य शिक्षाविदों एवं धार्मिक हस्तियों ने प्रतियोगिता के आयोजन की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को कुरआन से जोड़ने, उनकी शैक्षिक क्षमताओं को निखारने और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समारोह में वक्ताओं ने इस बात की भी सराहना की कि प्रतियोगिता को किसी एक विचारधारा या मसलक तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि सभी मसलकों के विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने का अवसर दिया गया। प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने इसे जमीयत की उदारता और व्यापक शैक्षिक दृष्टिकोण का उदाहरण बताया। वहीं, कारी अलाउद्दीन कासमी ने कहा कि प्रतिभागियों की संख्या और आयोजन की व्यवस्था के लिहाज से यह प्रतियोगिता अपनी अलग पहचान रखती है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतियोगिता छह वर्गों में आयोजित की गई, जिनमें संपूर्ण कुरआन का हिफ़्ज़, 20 पारे, 10 पारे, 5 पारे, कुरआन नाज़िरा और तफ़्सीर शामिल थे। विभिन्न वर्गों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार, प्रमाणपत्र और अन्य सम्मान दिए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र और प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता के निष्पक्ष संचालन के लिए देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े करीब 20 निर्णायकों ने अपनी सेवाएं दीं।

इस अवसर पर मौलाना खुर्शीद आलम मदनी, मौलाना मुहम्मद अली मदनी, मौलाना शफीक आलम जामई, प्रोफेसर मजहर आसिफ, हाफिज शकील अहमद मेरठी, डॉ. अब्दुल लतीफ कुंडी, मौलाना अब्दुल कुद्दूस उमरी और देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक उलेमा, शिक्षाविद और सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं। आयोजकों ने प्रतियोगिता की सफलता पर सभी प्रतिभागियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थानों का आभार व्यक्त किया।

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