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हाईकोर्ट का अहम फैसला: कोझिकोड ब्लास्ट के दो आरोपी नज़ीर और सफाज़ को बरी किया

झूठे आरोपों में जेल में बंद मुस्लिम युवाओं को पूरी जिंदगी बर्बाद होने के बाद इंसाफ मिलता हैं. जिसके कारण न यह घर के बचते हैं न घट के।

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कोझीकोड बम धमाका के आरोपियों को बइज़्ज़त बरी कर दिया।

हाईकोर्ट का यह फैसला गिरफ़्तारी के 15 साल बाद आया हैं यानी की इन दोनों ने 15 साल बिना किसी कसूर के जेल में बिताए।

मामला 2006 का हैं 3 मार्च 2006 को कोझिकोड में लगभग 12.30 से 1.00 बजे के बीच केएसआरटीसी और मुफस्सिल बस स्टैंड के अंदर दो स्थानों पर दो बम धमाके हुए।

जिसमें एनआईए की विशेष अदालत ने नजीर और सफाज़ दोनों को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम, 1967 (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “एनआईए के पास इन दोनों के खिलाफ कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है. जांच अधिकारी अंधेरे में तीर चला रहे हैं।”

हाईकोर्ट का यह फ़ैसला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मुंह पर जोरदार तमाचा हैं. लेकिन सवाल अब भी इनकी जवानी जो जेल में बर्बाद हुई हैं उसकी भरपाई कौन करेगा?

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