मणिपुर में जारी अशांति के बीच एक बार फिर हिंसक झड़प की खबर सामने आई है। राज्य के नोनी जिले के ताओदाइजांग गांव में बुधवार तड़के दो प्रतिद्वंद्वी नागा सशस्त्र गुटों के बीच कई घंटों तक गोलीबारी हुई, जिसमें तीन संदिग्ध उग्रवादियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटना की पुष्टि की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों गुटों के बीच मुठभेड़ बुधवार सुबह करीब 3:30 बजे शुरू हुई। गोलीबारी इतनी देर तक जारी रही कि सुरक्षा बलों को तत्काल घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घटना में मारे गए लोगों की पहचान जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेनचुई गुट) और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवाह) से जुड़े सदस्यों के रूप में बताई गई है। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों के हवाले से एक मृतक के जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट के कामसन गुट से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है।
इस गोलीबारी में दोनों संगठनों के कई अन्य सदस्यों के घायल होने की खबर है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों गुटों के बीच संघर्ष किस वजह से शुरू हुआ। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा और तनाव का दौर जारी है। उस समय मैतेई और कुकी-जो-हमार समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ था। इसके अलावा फरवरी से कुकी और नागा समुदायों के बीच भी तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में नागा सशस्त्र गुटों के बीच ताजा मुठभेड़ ने राज्य की सुरक्षा स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
सितंबर में विधानसभा को दी गई जानकारी के अनुसार, मई 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद से मणिपुर में कम से कम 310 लोगों की मौत हो चुकी है और 49 लोग अब भी लापता हैं। हिंसा के कारण करीब 60 हजार लोग विस्थापित हुए थे। इनमें से लगभग 36 हजार लोगों को दोबारा बसाया जा चुका है, जबकि करीब 24 हजार लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

