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‘मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है’: चुनाव से पहले मस्जिदों और मुस्लिम संरचनाओं पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष चिंतित

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले मस्जिदों और मुस्लिम समुदाय से जुड़ी अन्य संरचनाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने चिंता जताई है। विपक्ष का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण के नाम पर मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है और आने वाले महीनों में ऐसी कार्रवाइयां और तेज हो सकती हैं।

ये आशंकाएं 5 सितंबर को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब एक सदी पुरानी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने और मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद के प्रबंधन को कथित अनधिकृत निर्माण के मामले में नोटिस जारी किए जाने के बाद सामने आई हैं।

समाजवादी पार्टी के नेता और गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार चुनाव से पहले अतिक्रमण हटाने के नाम पर ऐसी संरचनाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाइयों का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण पैदा करने में किया जा सकता है। अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से मामले का संज्ञान लेने की अपील भी की।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने भी राज्य सरकार पर धार्मिक संरचनाओं को लेकर नोटिस जारी करने के जरिए ‘रोजमर्रा की सांप्रदायिकता’ का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में आधुनिक विकास और निर्माण संबंधी नियम लागू होने से कई दशक पहले धार्मिक संरचनाएं अस्तित्व में थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है तो सभी समुदायों की संरचनाओं पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने भी सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मस्जिदों, मदरसों और कब्रिस्तानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने सहारनपुर की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के बजाय सरकार का ध्यान मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई करने पर है।

सहारनपुर की मस्जिद को गिराए जाने का मामला अब कानूनी विवाद का हिस्सा भी है। मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी है। समिति का आरोप है कि आवश्यक वैधानिक नोटिस या औपचारिक आदेश के बिना ही ढांचा गिराया गया। समिति ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 से जुड़े कानूनी मुद्दे भी उठाए हैं।

हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, जिला अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की अपील खारिज कर दी थी, जिसमें संबंधित ढांचे को अवैध और सरकारी जमीन पर स्थित बताया गया था। मस्जिद के विध्वंस के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने मलबे के नीचे मिले करीब 20 फीट गहरे ईंटों से बने कुएं से नमूने भी एकत्र किए हैं।

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