मणिपुर में रविवार रात से हुई हिंसा की दो अलग-अलग घटनाओं में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद राज्य की राजधानी इंफाल में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। सोमवार को आक्रोशित प्रदर्शनकारी दो मृतकों के शव मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के आवास के बाहर ले आए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
पहली घटना इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास पहाड़ी इलाके में हुई, जहां जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने गए ग्रामीणों के एक समूह पर कथित तौर पर गोलीबारी की गई। स्थानीय विधायक थोकचोम लोकेशोर सिंह के मुताबिक, इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। कुछ लोगों के लापता होने की भी खबर है। पुलिस और सुरक्षाबलों ने घटनास्थल पर पहुंचकर इलाके को सुरक्षित किया।
मृतकों की पहचान अरुबम रोनिल, लैरेनलाकपाम इनाओबी और क्षत्रिमयुम सुशील के रूप में हुई है। घायलों में क्ष देवेन की हालत गंभीर बताई गई। मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। विधायक ने अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए इलाके के पास स्थित सिनाई शिविर को हटाने की अपील भी की। उन्होंने दावा किया कि असम राइफल्स के जवानों ने लकड़ी इकट्ठा करने गए ग्रामीणों को सुरक्षा का आश्वासन दिया था।
हिंसा की दूसरी घटना एक संगीत कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां कथित तौर पर पत्थरबाजी और गोलीबारी के बाद 24 वर्षीय एक युवक की मौत हो गई। यह घटना मैतेई और पंगल मुस्लिम आबादी वाले इलाके में हुई बताई गई है। इस घटना में भी कई लोगों के घायल होने की खबर है। दोनों घटनाओं के बाद इंफाल में तनाव बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर न्याय की मांग की। बाद में शवों को जवाहरलाल नेहरू आयुर्वेद संस्थान ले जाया गया।
मणिपुर में ताजा हिंसा ऐसे समय में हुई है, जब राज्य मई 2023 से शुरू हुए मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष के प्रभावों से अब तक उबर नहीं पाया है। इस बीच कामजोंग जिले में कुकी समुदाय के कम से कम 15 घरों में आग लगाए जाने की खबर है। एक अन्य कथित हमले में एक कुकी नागरिक की मौत और चार लोगों के घायल होने की सूचना मिली। शनिवार रात एक अलग घटना में तीन तंगखुल नागा नागरिक भी गोली लगने से घायल हुए थे। लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली की कोशिशों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

