Journo Mirror
Uncategorized

उत्तर प्रदेश: तालाब की जमीन पर कब्जे के आरोप में मस्जिद-मदरसे को नोटिस, 29 अक्टूबर को सुनवाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके मोहनलालगंज के खुजौली गांव में स्थित एक मस्जिद और मदरसे को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई है। कथित तौर पर तालाब की जमीन पर निर्माण किए जाने के मामले में राजस्व अदालत ने मस्जिद और मदरसे का प्रबंधन करने वाले चार लोगों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी को 29 अक्टूबर को पेश होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई सरकारी जांच के बाद की गई है। जांच में कथित तौर पर पाया गया कि मस्जिद और मदरसे की इमारतों के कुछ हिस्से राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज जमीन पर बने हुए हैं। हालांकि, अभी तक बेदखली या ध्वस्तीकरण का कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है।

यह मामला उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है। यह धारा कुछ सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने से संबंधित है। मामले की शुरुआत राज्य के जनशिकायत पोर्टल पर गांव के एक व्यक्ति की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तालाब की जमीन पर निर्माण किया गया है।

इसके बाद राजस्व निरीक्षक और भूमि अभिलेख विभाग के एक अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, विवादित जमीन के लगभग 0.03 हेक्टेयर यानी करीब 300 वर्ग मीटर हिस्से पर स्थायी निर्माण मौजूद है। अब संबंधित प्रबंधकों को अदालत में दस्तावेज पेश करने और जांच के निष्कर्षों को चुनौती देने का अवसर मिलेगा।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि विवाद जमीन के एक सीमित हिस्से को लेकर है। ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है कि पूरी मस्जिद या मदरसा सरकारी जमीन पर बना हुआ है। फिलहाल, इमारतों के निर्माण की उम्र, जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित प्रबंधकों के पक्ष की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों में चिंता है। उन्हें आशंका है कि जमीन के एक छोटे से हिस्से को लेकर शुरू हुआ विवाद मस्जिद और मदरसे, दोनों के खिलाफ कार्रवाई का कारण बन सकता है। अब 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित प्रबंधक अपने बचाव में कौन से दस्तावेज पेश करते हैं और अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम धार्मिक स्थलों से जुड़े भूमि विवादों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। हाल ही में सहारनपुर में सरकारी परिसर के भीतर स्थित एक मस्जिद को अनधिकृत कब्जे से संबंधित आदेश पर अदालत की मुहर लगने के बाद ध्वस्त कर दिया गया था। इस कार्रवाई की एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आलोचना की थी। उन्होंने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता बरतने की मांग की थी।

Related posts

Leave a Comment