असम के सोनितपुर जिले में 5 और 6 जनवरी को चलाए गए बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान के दौरान बंगाली मुसलमानों के लगभग 1,200 घरों को ध्वस्त कर दिया गया।
यह कार्रवाई बुरहाचापोरी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई। प्रशासन के अनुसार, यह अभियान करीब 650 हेक्टेयर वन भूमि को खाली कराने के उद्देश्य से चलाया गया।
बेदखली तेजपुर सदर और ढेकियाजुली राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले जमुकटोल, अरिमारी, सियालीचर, बघेटापु, गलातिदुबी, लाठीमारी, कुंडुलीचर, पुरबा दुब्रामारी और बटुलीचर जैसे इलाकों में की गई।
समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से एक अधिकारी ने कहा कि कथित अतिक्रमणकारियों ने अभयारण्य के भीतर घर बनाए थे और खेती भी कर रहे थे। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए आवश्यक थी।
गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी 2025 में भी प्रशासन ने वन्यजीव अभयारण्य के अंदर और आसपास की 2,099 हेक्टेयर जमीन खाली कराई थी, जिसे असम के सबसे बड़े बेदखली अभियानों में से एक बताया गया था।
2016 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से राज्य में कई जिलों में बेदखली और विध्वंस अभियान चलाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश बंगाली भाषी मुस्लिम बहुल इलाकों में हुए हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने दावा किया है कि सरकार ने अब तक ऐसे अभियानों के जरिए लगभग 1.5 लाख बीघा जमीन वापस ली है।
वहीं, विस्थापित परिवारों का कहना है कि वे दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे थे। उनका दावा है कि ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव के कारण उनके पूर्वजों ने नदी तटीय इलाकों से विस्थापित होकर यहां शरण ली थी। इससे पहले एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले 40 वर्षों में ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव से गोलपारा जिले के 472 गांव बह गए, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए।
पीटीआई के अनुसार, सोनितपुर के जिला आयुक्त आनंद कुमार दास ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बेदखली न करने के अनुरोध के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई की, क्योंकि लोग वन क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे थे।

