असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक विवादित बयान को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी फिर से सत्ता में आती है, तो “मिया समुदाय की कमर तोड़ दी जाएगी।” इस बयान के बाद विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
लखीमपुर जिले के ढाकुआखाना में आयोजित रैली में सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के “स्वदेशी लोगों” के लिए काम किया है और कथित अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में अतिक्रमित जमीन खाली कराई है।
असम में “मिया” शब्द आमतौर पर बंगाली मूल के मुस्लिम समुदाय के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसे कई लोग अपमानजनक मानते हैं। सरमा के इस बयान को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पहले भी उन पर समुदाय विशेष को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगते रहे हैं।
इस मामले में कानूनी पहलू भी सामने आया है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने हाल ही में उनके खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण को लेकर जवाब मांगा है, जबकि भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
असम में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होने वाले हैं और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में इस बयान ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। विपक्ष ने इस बयान को समाज में विभाजन पैदा करने वाला बताया है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष अपने रुख पर कायम नजर आ रहा है।

