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JNU प्रशासन ने छात्रसंघ पदाधिकारियों को दो सेमेस्टर के लिए निष्काशित किया, छात्रों ने राजनीतिक दमन का आरोप लगाया

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति पर बड़े प्रशासनिक एक्शन को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मुख्य प्रॉक्टर (Chief Proctor) द्वारा जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के चारों पदाधिकारियों — अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव — के साथ-साथ पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नितीश के खिलाफ दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेशन (निष्कासन) और आउट ऑफ बाउंड्स आदेश जारी किए गए हैं।

यह कार्रवाई डॉ. भीमराव आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए निगरानी (सर्विलांस) सिस्टम के खिलाफ हुए प्रदर्शन में भाग लेने को लेकर की गई है। छात्र संघ ने इस कदम को अभूतपूर्व राजनीतिक दमन करार दिया है।

जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति (VC) केंद्र की आरएसएस-समर्थित मोदी सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं और छात्र आवाज़ों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

छात्र संघ का कहना है कि यह कार्रवाई ऐसे समय पर की गई है जब यूजीसी Promotion of Equity Regulations 2026 को स्थगित किए जाने के खिलाफ एक बड़े छात्र आंदोलन की तैयारी चल रही थी। इसी के तहत कल मशाल जुलूस और 7 फरवरी को स्टूडेंट्स पार्लियामेंट आयोजित किया जाना था।

छात्र संघ ने कहा कि हाल ही में अदालत में 60 से अधिक छात्रों की कथित अवैध हिरासत के मामले में प्रशासन को झटका लगा था और जेएनयू में निजीकरण के खिलाफ स्टूडेंट्स ऑफ लैंग्वेज (SL) की सफल हड़ताल के बाद प्रशासन हताशा में इस तरह की दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है।

जेएनयूएसयू का आरोप है कि यह रस्टिकेशन आदेश प्रशासन के छात्र-विरोधी एजेंडे को दर्शाता है, जिसमें छात्रों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को केवल असहमति जताने के कारण कैंपस से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। छात्र संघ ने कहा कि यह कार्रवाई यह भी दिखाती है कि क्यों देशभर में छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाने की कोशिशें होती रही हैं।

छात्र संघ ने यह भी कहा कि सीपीओ मैनुअल (CPO Manual) छात्र संघ के कामकाज को नियंत्रित नहीं कर सकता और न ही छात्रों की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पहरा लगा सकता है।

जेएनयूएसयू ने स्पष्ट किया कि यूनियन छात्रों के जनादेश से चलती है और इस तरह के दमन का जवाब भी उसी जनादेश के ज़रिए दिया जाएगा।

जेएनयूएसयू ने पूरे छात्र समुदाय से अपील की है कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर छात्र संघ के समर्थन में खड़ा हो और कैंपस राजनीति पर किए जा रहे इस कथित हमले तथा प्रशासन से सवाल पूछने वाली आवाज़ों को दबाने की कोशिशों का विरोध करे।

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