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तुर्कमान गेट बुलडोजर कार्रवाई पर वामपंथी संगठनों की संयुक्त जांच, ‘कानून की अवहेलना और राज्य दमन’ का आरोप

दिल्ली के तुर्कमान गेट में हुई बुलडोजर कार्रवाई और उसके बाद बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों की जांच के लिए CPI-(ML), AICCTU, AISA, AIPWA और AILAJ की संयुक्त जांच टीम इलाके में पहुंची।

टीम ने स्थानीय निवासियों, प्रभावित परिवारों, कानूनी सलाहकारों और समुदाय के बुजुर्गों से बातचीत के बाद आरोप लगाया कि यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी और संविधान प्रदत्त अधिकारों के उल्लंघन का मामला है।

जांच टीम के अनुसार, तुर्कमान गेट में हुई तोड़फोड़ को प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर उचित ठहराने की कोशिश की गई, जबकि वास्तव में यह भाजपा शासित इलाकों में चल रहे ‘बुलडोजर राज’ का हिस्सा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कार्रवाई विशेष समुदायों को निशाना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से की गई। टीम का दावा है कि अदालत द्वारा दिए गए समय की अवहेलना करते हुए रात करीब 2 बजे तोड़फोड़ की गई, ताकि किसी तरह की न्यायिक रोक न लग सके।

स्थानीय लोगों ने बताया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद परिसर में इबादत स्थल के साथ-साथ ट्यूशन सेंटर, शादी हॉल और क्लिनिक जैसी जन-उपयोगी सुविधाएं थीं, जिन्हें गिरा दिया गया। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा कि यहां वर्षों से दोनों समुदायों के लोग मिल-जुलकर काम करते रहे हैं और यह महज जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि सुनियोजित कार्रवाई है।

जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस ने डर और दबाव का माहौल बनाते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें नाबालिग भी शामिल थे। एक मामले में 15 और 11 वर्ष की दो बहनों को उनके भाई पर दबाव बनाने के लिए थाने में रोके जाने का आरोप लगाया गया।

टीम ने इसे ‘कैप्चर बाय प्रॉक्सी’ की रणनीति बताते हुए कहा कि परिजनों को निशाना बनाकर युवकों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया।

रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड को आंतरिक रूप से कमजोर करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका के कारण वक्फ बोर्ड ने तोड़फोड़ के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए।

जांच टीम ने इसे मुस्लिम बहुल इलाके को बदनाम करने और सांप्रदायिक राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया।

जांच टीम ने मांग की है कि किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन और गैरकानूनी गिरफ्तारियों की तत्काल जांच हो, सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए, वक्फ की स्वायत्तता बहाल की जाए और नष्ट की गई जन सुविधाओं के लिए पूरा मुआवजा दिया जाए।

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