मार्च 2026 के पहले सप्ताह में भारत के कई राज्यों में हिंसा और भीड़ द्वारा हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों में हुई इन घटनाओं ने देश में बढ़ते नफरत और भीड़ हिंसा के माहौल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन मामलों में बच्चों, अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एक 13 वर्षीय मुस्लिम लड़के की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, लड़का कार में बैठा हुआ था जब आरोपी के घर के पास उसके सिर में गोली लगी।
वहीं बिहार में 65 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति की लोहे की रॉड से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बताया गया कि उन्होंने स्थानीय विवाद के दौरान मुसलमानों के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों का विरोध किया था।
हरियाणा के पलवल जिले के 28 वर्षीय मुस्लिम ट्रक ड्राइवर की भी राजस्थान के भिवाड़ी के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के परिवार का आरोप है कि इस घटना में हिंदुत्व से जुड़े कुछ समूहों के लोग शामिल थे। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बिहार के मधुबनी जिले में भीड़ हिंसा की एक अन्य घटना में एक मुस्लिम महिला की मौत हो गई। आरोप है कि गांव के मुखिया के बेटे के नेतृत्व में भीड़ ने हमला किया था। इसी तरह ओडिशा के मयूरभंज जिले में बकरी चोरी के शक में गांव वालों ने दो नाबालिगों पर हमला कर दिया, जिसमें 14 वर्षीय लड़के की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।
इसके अलावा तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के पेरुम्पथ्थु गांव में कथित जातीय हिंसा की घटना में एक दिव्यांग दलित व्यक्ति और ओडिशा के एक प्रवासी मजदूर की भी हत्या कर दी गई।
इन घटनाओं ने देश में बढ़ती भीड़ हिंसा और सामाजिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और कानून का सख्ती से पालन कराने की जरूरत है।

