तेलंगाना में कांग्रेस सरकार को वेमुलावाड़ा में एक मंदिर के पास स्थित सदियों पुरानी दरगाह को ध्वस्त किए जाने के बाद तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
आरोप है कि यह कार्रवाई मंदिर विस्तार को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई, जबकि तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड और स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध किया था।
तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड ने राजन्ना सिरसिल्ला जिले के कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा कि वेमुलावाड़ा स्थित दरगाह हजरत ताजुद्दीन ख्वाजा बाग सवार 11 जनवरी 1990 को राजपत्र में अधिसूचित एक विधिवत वक्फ संपत्ति है, जिसके साथ 25.20 एकड़ जमीन भी दर्ज है।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का स्थानांतरण या बदलाव उसकी पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।
बोर्ड के अनुसार, उसकी जांच में पाया गया कि विकास समिति और कथित मुतवल्ली ने दरगाह को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव स्थानीय प्रशासन को दिया था, लेकिन समुदाय के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया।
बाद में मुतवल्ली ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें किसी बदलाव की अनुमति देने का अधिकार नहीं था। बोर्ड ने प्रशासन से दरगाह की मौजूदा स्थिति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से बचने की अपील की।
हैदराबाद स्थित राजनीतिक दल मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी ने इसे संवैधानिक गारंटी और वक्फ कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि बिना बोर्ड की मंजूरी किसी धार्मिक स्थल को हटाया नहीं जा सकता।
इसी तरह ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी कथित विध्वंस को “अवैध और निंदनीय” बताया। पार्टी ने मांग की कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो और दरगाह का पुनर्निर्माण उसके मूल स्थान पर किया जाए।
एमबीटी प्रवक्ता अमजेदुल्लाह खान ने आरोप लगाया कि लगभग 600 साल पुराने इस स्थल को लंबे समय से हटाने की मांग की जा रही थी।
पत्रकार मुबाशिर खुर्रम ने भी घटना की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि क्या मंदिर विस्तार के नाम पर धार्मिक संरचनाओं को हटाना उचित है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जबकि अल्पसंख्यक आयोग से मामले में हस्तक्षेप की उम्मीद जताई जा रही है।

