पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों के साथ कथित तौर पर उत्पीड़न, मारपीट और जबरन धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों की ओर से पैरवी कर रहे एक वकील के आरोपों के मुताबिक, बजरंग दल से जुड़े लोगों ने परिवारों पर ईसाई धर्म छोड़ने का दबाव बनाया। आरोप है कि विरोध करने पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया, उनके कपड़े फाड़े गए और एक नाबालिग लड़की के साथ भी मारपीट की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मकतूब मीडिया की 20 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित परिवारों ने बताया कि उत्पीड़न की शुरुआत 18 अक्टूबर को हुई और 19 तथा 20 अक्टूबर को भी यह जारी रहा। वकील ने आरोप लगाया कि एक परिवार के घर पहुंचे लोगों ने उन्हें ईसाई धर्म छोड़ने के लिए कहा। इनकार करने पर कथित तौर पर मारपीट की गई, जिसमें एक महिला के सिर पर गंभीर चोट लगी और वह बेहोश हो गई। वकील के मुताबिक, महिला ने बताया कि बेहोशी की हालत में भी उसे एहसास हुआ कि कोई उसकी साड़ी उतार रहा था। आरोप है कि उसे कथित शुद्धिकरण की रस्म के लिए स्नान करने को भी मजबूर किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चंद्रकोना थाना क्षेत्र में तीन परिवारों को निशाना बनाए जाने का आरोप है। वकील के अनुसार, करीब 14 साल की एक नाबालिग लड़की की कथित तौर पर गर्दन दबाई गई और लोगों के सामने उसके कपड़े फाड़ दिए गए। परिवार ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने लड़की के अपहरण और बलात्कार की धमकी भी दी। सुरक्षा के मद्देनजर परिवार ने लड़की को दूसरी जगह भेज दिया है। आरोप है कि परिवारों को पुलिस के पास जाने पर जिंदा जलाने की धमकी भी दी गई।
वकील ने दावा किया कि इन परिवारों को पिछले करीब दो वर्षों से परेशान किया जा रहा था, लेकिन हाल के दिनों में उत्पीड़न बढ़ गया। परिवारों की ओर से शिकायत दर्ज कराने की कोशिश किए जाने के बावजूद कथित तौर पर पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों ने आपातकालीन नंबर 100 पर भी फोन किया था। वकील ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर दूसरे पक्ष की बात मानने को कहा। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष रिपोर्ट में सामने नहीं आया। पश्चिम मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किए जाने पर भी जवाब नहीं मिलने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 20 अक्टूबर की सुबह करीब 7:30 बजे तीनों परिवारों के पतियों को कथित तौर पर अपने साथ ले जाया गया, जबकि महिलाओं से कहा गया कि उन्हें धार्मिक रस्मों के लिए मंदिर ले जाया जाएगा। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि परिवारों को घर से बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा था और घायल लोगों को भी बाहर जाने से रोका गया। पीड़ित परिवारों की मांग है कि वे अपनी धार्मिक आस्था बनाए रखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकें और पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें।
इस घटना को पश्चिम बंगाल में ईसाई समुदाय के खिलाफ कथित हमलों की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। रिपोर्ट में स्वतंत्र निगरानी संस्था इंडिया हेट लैब के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि मई से सितंबर 2026 के बीच ईसाइयों को निशाना बनाकर किए गए कम से कम 60 घृणा अपराध दर्ज किए गए। रिपोर्ट में मई 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में ईसाई समुदाय के खिलाफ कथित शत्रुता बढ़ने का भी उल्लेख है। पश्चिम मेदिनीपुर और आसपास के जिलों में भी ऐसे मामलों की खबरें सामने आने की बात कही गई है।

