दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके जामिया नगर में स्कूली शिक्षा की स्थिति पर वर्ष 2026 की एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट जारी की गई है। “School Education in a Muslim-Concentrated Urban Neighbourhood” शीर्षक से प्रकाशित इस अध्ययन को शोधकर्ता Dr. Abid Faheem ने तैयार किया है।
यह अध्ययन Jamaat-e-Islami Hind (दिल्ली हल्का) और शोध संस्था nous के संयुक्त प्रयास से किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक जामिया नगर की 12 बस्तियों में 2,700 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 3,872 मुस्लिम बच्चों के शिक्षा संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन में स्कूल में नामांकन, ड्रॉपआउट, अभिभावकों की आय, प्रवासन स्थिति, स्कूलों की उपलब्धता और बच्चों के सीखने के स्तर की जांच की गई।
रिपोर्ट के अनुसार 94% बच्चे वर्तमान में स्कूल में नामांकित हैं। हालांकि 3.7% बच्चे कभी स्कूल नहीं गए, जबकि 2.3% बच्चों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी. ड्रॉपआउट के मामले अधिकतर 17–18 वर्ष की आयु में सामने आए।
लड़कों में ड्रॉपआउट दर (58.1%) लड़कियों (41.9%) से अधिक पाई गई। आर्थिक तंगी, पढ़ाई में कठिनाई और पारिवारिक परिस्थितियां प्रमुख कारण बताए गए।
प्रवासी परिवारों से आने वाले बच्चों में ड्रॉपआउट का अनुपात ज्यादा पाया गया। सर्वे में शामिल 51.7% परिवार दूसरे राज्यों से आए हुए थे, जिनमें अधिकतर उत्तर प्रदेश और बिहार से थे।
रिपोर्ट बताती है कि 56.7% बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जबकि 40.2% सरकारी स्कूलों में नामांकित हैं।
84.3% बच्चे अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाई कर रहे हैं। जामिया नगर में कुल 125 शैक्षणिक संस्थान चिन्हित किए गए, जिनमें से 84.8% केवल पांच इलाकों — अबुल फजल एन्क्लेव, शाहीन बाग, बाटला हाउस, जोगाबाई और जाकिर नगर — में केंद्रित हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि शाहीन बाग जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में एक भी सरकारी स्कूल नहीं है। केवल 17.6% संस्थान वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक शिक्षा उपलब्ध कराते हैं, जिससे उच्च कक्षाओं में संस्थागत कमी स्पष्ट होती है।
कक्षा 3 में अंग्रेज़ी में एक भी बच्चा पूरा वाक्य नहीं पढ़ सका। कक्षा 8 में गणित में विभाजन स्तर का प्रश्न हल करने वाले बच्चों की संख्या मात्र 30.9% रही। ये आंकड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षणों की तुलना में भी कमज़ोर प्रदर्शन दर्शाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 97.4% बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। बावजूद इसके, केवल 20.8% बच्चे निजी कोचिंग ले रहे हैं। कोचिंग का खर्च आर्थिक रूप से मजबूत परिवार ही अधिक उठा पा रहे हैं, जिससे असमानता बढ़ रही है।
रिपोर्ट में सरकार और स्थानीय प्रशासन को जामिया नगर में माध्यमिक व वरिष्ठ माध्यमिक सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा प्रारंभिक कक्षाओं में भाषा और गणित की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने, छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली सुधारने और आंगनवाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई गई है। नागरिक समाज संगठनों और समुदाय से भी कोचिंग सहायता, करियर मार्गदर्शन और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की अपील की गई है।

