भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन बातचीत के बाद ईरान की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इस बयान में ईरान के विदेश मंत्री ने पिछले 11 दिनों के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए कथित हमलों का विस्तार से उल्लेख किया।
ईरान के विदेश मंत्री के अनुसार, युद्ध के पहले दिन मिनाब शहर में लड़कियों के एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल हमला किया गया। इसके बाद आम नागरिकों के इलाकों और सार्वजनिक सेवा केंद्रों पर भी बड़े पैमाने पर हमले किए गए।
उन्होंने कहा कि ईरान अपनी एकता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बयान में अमेरिका और इज़राइल की इन कार्रवाइयों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया।
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि सभी देशों की जिम्मेदारी है कि वे इस तरह के सैन्य हमलों और खुले तौर पर कानून तोड़ने की निंदा करें।
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। ईरान की ओर से कहा गया कि फारस की खाड़ी में शिपिंग सुरक्षा बनाए रखने के लिए ईरान हमेशा सिद्धांतों के आधार पर काम करता रहा है।
ईरान ने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा को लेकर पैदा हुई अस्थिर स्थिति अमेरिका की आक्रामक और अस्थिर करने वाली नीतियों का परिणाम है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
वहीं भारत के विदेश मंत्री ने तेहरान और नई दिल्ली के बीच संबंधों को बनाए रखने और मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए लगातार संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया।

