ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि ईरान ने मौजूदा संघर्ष के बीच किसी भी तरह के युद्धविराम का अनुरोध नहीं किया है और देश की सेना जरूरत पड़ने तक लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने यह बात CBS News को दिए एक साक्षात्कार में कही।
अराघची ने कहा कि ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई के बावजूद तेहरान ने न तो युद्धविराम की अपील की है और न ही संघर्ष समाप्त करने के लिए किसी वार्ता की पहल की है।
उनके अनुसार ईरान की सशस्त्र सेनाएँ देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आवश्यक होने तक जवाबी कार्रवाई जारी रखेंगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान ने जवाबी हमलों की एक श्रृंखला शुरू की है जिसे “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4” नाम दिया गया है। उनके अनुसार इन हमलों में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया गया, जिनमें से कुछ हमले फारस की खाड़ी क्षेत्र से किए गए।
Strait of Hormuz के बारे में बोलते हुए अराघची ने कहा कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की पूरी तरह नाकाबंदी नहीं की है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में जहाजरानी को असुरक्षित बनाने के लिए अमेरिकी हमले जिम्मेदार हैं, जिसके कारण कई शिपिंग कंपनियों और तेल निर्यातकों ने अपने संचालन अस्थायी रूप से रोक दिए हैं।
अराघची के अनुसार यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अचानक हमला किया। उन्होंने कहा कि उस हमले में Ali Khamenei और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी, जबकि उस समय परमाणु समझौते को लेकर बातचीत भी जारी थी।
ईरानी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि इस युद्ध के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को उनके सलाहकारों ने गुमराह किया। उन्होंने कहा कि ईरान केवल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है और उसके हमले केवल हमलावर देशों और उनके सैन्य ठिकानों तक सीमित हैं, न कि पड़ोसी देशों पर।
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है।

