राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने देश के विभिन्न राज्यों में कश्मीरी छात्रों और शॉल विक्रेताओं के खिलाफ कथित उत्पीड़न, भेदभाव और हमलों की शिकायतों का संज्ञान लिया है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के अनुसार, आयोग ने मामले को औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया है और संबंधित राज्यों से रिपोर्ट मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसोसिएशन का कहना है कि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों को धमकियों, सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग, उत्पीड़न और शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ा। यह शिकायत JKSA के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई कश्मीरी शॉल विक्रेताओं को धमकाया गया, उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें अपना व्यवसाय करने से रोका गया। कुछ मामलों में व्यापारियों को उन क्षेत्रों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा जहां वे वर्षों से रहकर काम कर रहे थे। वहीं छात्रों ने आवास से इनकार, सांप्रदायिक भेदभाव और डराने-धमकाने जैसी समस्याओं की शिकायत की है।
JKSA के अनुसार, NHRC ने शिकायत को स्वीकार करते हुए इसे केस नंबर 684/90/0/2026 के रूप में दर्ज किया है। आयोग अब संबंधित राज्य सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगेगा, जिसमें दर्ज एफआईआर, गिरफ्तारियां, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और कश्मीरी छात्रों व व्यापारियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शामिल होगा।
एसोसिएशन ने आयोग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि कश्मीरी भी देश के समान नागरिक हैं और उन्हें पूर्ण संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए। संगठन ने कहा कि पहचान, क्षेत्र, धर्म या पहनावे के आधार पर किसी भी नागरिक के खिलाफ हिंसा, भेदभाव या सामाजिक बहिष्कार का लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है।
JKSA का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में विभिन्न राज्यों से ऐसी कई घटनाओं की रिपोर्ट मिली हैं, जिनके कारण कुछ कश्मीरी व्यापारियों को अपना कारोबार छोड़कर जम्मू-कश्मीर लौटना पड़ा। संगठन ने उम्मीद जताई कि NHRC का हस्तक्षेप कश्मीरी नागरिकों की सुरक्षा, गरिमा और आजीविका से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

